
भारत का नाम INDIA रखने का विरोध क्यों कर रहे थे मोहम्मद अली जिन्ना?
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इंडिया बनाम भारत पर चल रही बहस के बीच जिन्ना का जिन्न भी बाहर आ गया है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि जिन्ना ने ही इंडिया नाम का विरोध किया था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या वाकई जिन्ना ने भारत का नाम इंडिया रखे जाने का विरोध किया था?
इंडिया या भारत या फिर दोनों... देश का नाम क्या होगा? इस पर नई बहस छिड़ गई है. देश के नाम को लेकर चल रही बहस में अब मोहम्मद अली जिन्ना की एंट्री भी हो गई है.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर लिखा, 'जब इस विषय पर चर्चा हो रही है, तो हमें ये याद रखना चाहिए कि जिन्ना ने ही 'इंडिया' नाम पर आपत्ति जताई थी. इसलिए क्योंकि हमारा देश ब्रिटिश राज का उत्तराधिकारी राष्ट्र था और पाकिस्तान एक अलग राष्ट्र. सीएए की तरह बीजेपी सरकार जिन्ना के विचारों का समर्थन कर रही है.'
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने थरूर का पलटवार किया. उन्होंने कहा, 'थरूर ने जो कहा वो आधा सच और आधा झूठ है. जिन्ना ने क्या कहा था, ये अहम नहीं है. हमारे लिए जरूरी ये है कि हमारे संतों-ऋषियों ने इंडिया नहीं बल्कि भारत का इस्तेमाल किया था.'
क्या सच में जिन्ना ने इंडिया का विरोध था?
15 अगस्त 1947 को आजादी मिली. बंटवारे के बाद पाकिस्तान बना. लुईस माउंटबेटन भारत के पहले गवर्नर जनरल बने. आजादी से पहले वो वायसराय हुआ करते थे. वहीं, पाकिस्तान के गवर्नर जनरल बने मोहम्मद अली जिन्ना.
रेनर ग्रोट और टिलमैन रोडर की किताब 'कंस्टीट्यूशनलिज्म इन इस्लामिक कंट्रीजः बिटवीन अपहीवल एंड कंटीन्यूटी' में एक किस्सा है, जिसमें जिन्ना के 'इंडिया' नाम का विरोध करने का जिक्र है.

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