
ब्लैक फंगस की वजह कोरोना वायरस के उपचार में जिंक का उपयोग तो नहीं?
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विशेषज्ञों ने कोरोना संक्रमितों के उपचार में जिंक का उपयोग बंद कराने की मांग की और कहा कि इस बीमारी के पीछे अन्य कारणों का पता लगाना चाहिए.
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच इन दिनों ब्लैक फंगस के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं. 22 मई तक देशभर से कोरोना संक्रमितों में ब्लैक फंगस के लगभग नौ हजार मामले सामने आ चुके हैं. मिट्टी में पाए जाने वाले मोल्ड और कार्बनिक पदार्थों के सड़ने से होने वाली इस दुर्लभ बीमारी के कारण अब तक 212 लोगों की जान जा चुकी है. इसमें महाराष्ट्र के 90 और 61 लोग गुजरात के शामिल हैं. ब्लैक फंगस कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, रोग प्रतिरक्षा से समझौता करने वाले व्यक्तियों, सुगर या स्टेरॉयड की अधिक खुराक वाले लोगों को प्रभावित करता है. इस बीमारी की चपेट में अब कुछ ऐसे युवा भी दिख रहे हैं, जिनका इम्यूनोसप्रेशन का इतिहास नहीं है. यह चिंता की बात है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ब्लैक फंगस के प्रसार को रोकने के निर्देश दिए गए थे. इसके बाद तमिलनाडु, गुजरात, ओडिशा, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, तेलंगाना और चंडीगढ़ में इसे महामारी घोषित किया गया है.
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