
बोकारो: शहर के पॉश इलाके में मिला 6 किलो यूरेनियम, परमाणु बम बनाने में आता है काम
AajTak
झारखंड का बोकारो अब तक एशिया में बोकारो स्टील प्लांट की वजह से जाना जाता था, पर अब इसके इंटरनेशनल यूरेनियम कनेक्शन भी जुड़ने लगे हैं. इसने देश की खुफिया एजेंसियां के साथ साथ शासन व प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.
झारखंड का बोकारो अब तक एशिया में बोकारो स्टील प्लांट की वजह से जाना जाता था, पर अब इसके इंटरनेशनल यूरेनियम कनेक्शन भी जुड़ने लगे हैं. इसने देश की खुफिया एजेंसियां के साथ-साथ शासन व प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. यूरेनियम का उपयोग एटॉमिक पावर व परमाणु हथियारों के निर्माण में होता है और रेडियो एक्टिव होने के कारण इसको लेकर बेहद सतर्कता की जरूरत होती है. इस हालत में उसकी तस्करी का मामला उजागर होना स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ाती है. पुलिस को मिले इनपुट के आधार पर बोकारो जिले के कई इलाकों में की गई कार्रवाई में यूरेनियम तस्करी से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से लगभग 6 किलोग्राम वजन में करोड़ों रुपये मूल्य का यूरेनियम बरामद किया गया है. यूरेनियम बोकारो कैसे पहुंचा और इसका क्या उपयोग किया जाना था तथा इसका इंटरनेशनल कनेक्शन किस-किस से जुड़ा हुआ है, इस संगीन मामले में बेहद गोपनीय तरीके से पुलिस कार्रवाई कर रही है.
2002 का वह दिन था. पश्चिम एशिया के सात देशों के सात राजदूत दिल्ली में संघ के मुख्यालय 'केशव कुंज' में केएस सुदर्शन के साथ वार्त्तालाप करने के लिए उपस्थित थे. सभी राजदूत संघ प्रमुख केएस सुदर्शन की बातें सुनने के लिए दो घंटे तक जमीन पर बैठे रहे. इस चर्चा में के एस सुदर्शन ने भारत की हजारों वर्षों की समावेशी परंपरा से मुस्लिम देशों के राजदूतों को अवगत कराया. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

पुणे शहर में एक गंभीर सड़क हादसा उस समय हुआ जब एक नशे में धुत चालक ने तेज रफ्तार से वाहन चलाते हुए अपना संतुलन खो दिया. दुर्घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें वाहन सीधे सड़क किनारे लगे दुकानों से टकराता दिख रहा है. जोरदार टक्कर की वजह से दुकानों के शटर, सामान और ढांचे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. इस घटना के बाद पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया है.

रिटायर्ड एसबीआई निदेशक राजकुमार मेहता को उनका बेटा युवराज फोन करता है 'मुझे बचा लीजिए, मैं डूब जाऊंगा… मेरी कार नाले में गिर गई है.' आधे घंटे बाद पिता घटना स्थल पर पहुंचते हैं. पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ के 80 कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद संसाधनों की कमी और जोखिम के डर के चलते कोई पानी में नहीं उतरता. निक्कमे सिस्टम और बेबस पिता के सामने ही युवराज तड़प-तड़प कर दम तोड़ देता है.










