
'बेवतनों' की वतन वापसी... हाथों में हथकड़ी, पैरों में जंजीर बांधकर लाए गए भारतीय, जसपाल ने बताया एक-एक सच!
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झुकी हुई निगाहें, पैरों में बेड़ियां, हाथों में हथकड़ियां और दिल में ढेर सारा गुस्सा और जिल्लत. कहानी जसपाल की है. अमृतसर एयरपोर्ट पर अमेरिका वायु सेना के मालवाहक विमान C-17 से उतरने वाले 36 साल के जसपाल जुलाई में अमेरिका के लिए निकले थे. यहां पहुंचने में 6 महीने लग गए. इस बीच ब्राजील में उन्होंने 5 से 6 महीने गुजारे. यहां से अमेरिकी बॉर्डर में घुसते ही यूएस बॉर्डर पेट्रोल पुलिस की नजर उन पर पड़ी.
ये कहानी 'क्रैश' हो चुके उस अमेरिकन ड्रीम की है जिसका प्लेन बुधवार को अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. दर्जनों 'बेवतन' चेहरों को वापस वतन लेकर. जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े 'चौकीदार' के कानून ने बैगर पहचान के, बगैर कागज के घोषित कर दिया. झुकी हुई निगाहें, पैरों में बेड़ियां, हाथों में हथकड़ियां और दिल में ढेर सारा गुस्सा और जिल्लत.
ये कहानी किसी हरविंदर की, किसी जसपाल, किसी निकिता तो किसी केतुल पटेल की है. सबने एक ही सपना देखा था. अच्छी जिंदगी का. लेकिन ये सपना ट्रंप के पॉलिटिकल डिजाइन की भेंट चढ़ गया. ट्रंप, जिनकी राष्ट्रवाद और 'अमेरिका फर्स्ट' की अहंकारी व्याख्या ने अमेरिकी उदारवाद को बेदम कर दिया. फिर ऐसे 'घुसपैठियों' को सफाई देने का मौका कब मिलता कि वे कैसे अपने सपनों का पीछा करते-करते उनके देश में पहुंचे.
पैर में बेडियां, हाथों में हथकड़ी
उन्हें अमेरिकी एजेंटों ने न जाने कहां से कैसे उठाया, एक परेड कराई. पैर में बेडियां बांधी, हाथों में हथकड़ी पहनाए और माल ढोने वाले सेना के महाकाय में लाद दिया.
गुरुदासपुर के हरदोवाल गांव के जसपाल के अमेरिका गमन की कहानी जुलाई 2024 में शुरू होती है. जिस अमेरिका तक दिल्ली से विमान से पहुंचने में 25-30 घंटे लगते हैं वहां पहुंचने में जसपाल को 4400 घंटे लगे यानी की 6 महीने.
अमृतसर एयरपोर्ट पर अमेरिका वायु सेना के मालवाहक विमान C-17 से उतरने वाले 36 साल के जसपाल बुधवार रात को लगभग 6 महीने बाद अपने गांव पहुंचे. वो बताते हैं कि प्लने में उनके हाथों में हथकड़ियां थी, पैरों में चेन बंधे थे. प्लेन में जब उनलोगों बिठाया जा रहा था तो उन्हें नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है.

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