
बुद्धिमान, तेजतर्रार और निडर... हर बार आपदा पीड़ितों को मौत के जबड़े से निकाल लाता है NDRF, जानें कैसे करता है काम
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एनडीआरएफ 12 बटालियन से बना है. इन बटालियनों को अर्धसैनिक बलों की तरह ही संगठित किया जाता है. प्रत्येक बटालियन में जवानों की कुल संख्या 1149 है. एनडीआरएफ की प्रत्येक बटालियन 18 सेल्फ कंटेन्ड स्पेशलिस्ट सर्विस करने में सक्षम है.
भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, तूफान, बड़े स्तर पर आग, बम धमाके आदि जैसी कोई आपदा जब भी देश में या अन्य किसी देश में भी आती है तो खबरों में एक शब्द बार-बार सुनने को मिलता है. ये है एनडीआरएफ. अब इन दिनों तुर्की और सीरिया में भूकंप के चलते आए महाविनाश में जारी बचाव और राहत की खबरों में ये शब्द बार- बार सुनाई दे रहा है. दरअसल भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत इन देशों में मदद के लिए NDRF की कई टीमें भेजी हैं. आखिर ये एनडीआरएफ है क्या और बड़ी से बड़ी मुसीबत में लोगों की मदद को उतरने में क्यों नहीं घबराता? कैसे ये मौत के मुंह में दबे मासूमों को बड़ी बहादुरी से खींच लाता है?
दरअसल, एनडीआरएफ या राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल एक स्पेशल यूनिट है जो आपदा की स्थिति के लिए एक्सपर्ट और डेडिकेटेड रेस्पोंस के लिए गठित किया गया है. इस यूनिट के गठन का संवैधानिक प्रावधान आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44-45 के माध्यम से किया गया है. 2006 में बनकर तैयार हुआ हुए NDRF के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ऑफिशियल सुप्रीम यूनिट है. भारत के प्रधानमंत्री एनडीएमए के अध्यक्ष हैं.
कई बड़ी तबाहियों के बाद बनाया गया NDRF
एनडीआरएफ की आधिकारिक वेबसाइट www.ndrf.gov.in के अनुसार नब्बे के दशक के मध्य और उसके बाद के दशक में आपदा प्रतिक्रिया और तैयारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बहस और चर्चा हुई. यहां योकोहामा स्ट्रैटेजी प्लान (1994) और ह्योगो फ्रेमवर्क फॉर एक्शन (2005) कुछ अधिक इफेक्टिव थे, जिन्हें यूएन द्वारा अपनाया गया था. इसी दौरान भारत ने उड़ीसा सुपर साइक्लोन (1999), गुजरात भूकंप (2001) और हिंद महासागर सुनामी (2004) जैसी कुछ सबसे गंभीर नेचुरल डिजास्टर का सामना किया. इन घटनाओं के बाद एक डिजास्टर मैनेजमेंट यूनिट की जरूरत महसूस हुई. इसके बाद 26 दिसंबर, 2005 को आपदा प्रबंधन अधिनियम को लाया गया. आपदा प्रबंधन के लिए नीतियों, योजनाओं और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने के लिए साल 2006 में केवल 8 बटालियन के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का गठन किया गया था.
बड़ी आपदाओं में होती है तैनाती
बिजनेस इंसाइडर की एक खबर के अनुसार भारत में आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है. गृह मंत्रालय प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार में नोडल मंत्रालय है. जब देश पर कोई गंभीर आपदा आती है तो प्रभावित राज्य को आवश्यक सहायता और सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है. इसमें सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, आवश्यक संचार और अन्य चीजों की तैनाती भी शामिल होगी.

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