
बिहार में बदली-बदली नजर आ रही ओवैसी की चाल, AIMIM के लिए 2020 जैसी जीत क्यों नहीं आसान?
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बिहार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने अपने 25 उम्मीदवार उतारे हैं. इस बार सीमांचल के साथ-साथ बिहार के दूसरे इलाके की सीटों पर भी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन इस बार ओवैसी की सियासी चाल बदली हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2020 की तरह जीत दर्ज कर पाएंगे?
मुस्लिम सियासत का चेहरा माने जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी इस बार बिहार के चुनावी मैदान में अपनी सियासी चाल बदलकर उतरे हैं. ओवैसी की पहले कोशिश थी कि विपक्षी महागठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ा जाए, लेकिन आरजेडी और कांग्रेस के इनकार के बाद AIMIM ने पहले अकेले और फिर छोटे दलों के साथ मिलकर किस्मत आजमाने का फैसला किया.
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए AIMIM ने 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इस बार सीमांचल ही नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार की सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं. ओवैसी ने मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू कैंडिडेट भी उतारे हैं. इस तरह बदले हुए सियासी तेवर के साथ उतरे ओवैसी क्या 2020 जैसा करिश्मा AIMIM दोहरा पाएगी?
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करते हुए कहा था कि AIMIM की बिहार इकाई ने राष्ट्रीय नेतृत्व से सलाह-मशविरा करके कैंडिडेट की सूची जारी की है. हम बिहार के सबसे कमज़ोर और सबसे उपेक्षित लोगों के लिए न्याय की आवाज़ बनेंगे.
ओवैसी के 25 उम्मीदवारों की लिस्ट
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