
बिहार के सियासी 'चौधरियों' के पीछे क्यों पड़े हैं प्रशांत किशोर? क्या है रणनीति
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बिहार की सियासत में किस्मत आजमाने उतरे प्रशांत किशोर विपक्ष के कई दिग्गज नेताओं की किस्मत बिगाड़ते नजर आ रहे हैं. पीके ने निशाने पर उन नेताओं को ले रखा है, जिनके चेहरे के इर्द-गिर्द विपक्ष चुनावी बिसात बिछा रहा था. पीके ने हर रोज एक नया आरोप लगाकर सियासी माहौल गर्मा दिया है.
बिहार की सियासत में किंगमेकर नहीं बल्कि किंग बनने का ख़्वाब लेकर उतरे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अपने फुल फ़ॉर्म में हैं. पीके ने सियासी पिच पर क़दम रखा तो सबसे पहले बिहार के सियासी मिजाज को समझने के लिए दो साल तक गाँव-गाँव ख़ाक छानी. सियासी माहौल बनाने के बाद अब पीके चुनावी तपिश के बीच आक्रामक मोड में बिहार के सियासी 'चौधरियों' को अपने निशाने पर ले रखा है.
प्रशांत किशोर ने पहले आरजेडी के चेहरा माने जाने वाले तेजस्वी यादव को निशाने पर लिया, लेकिन चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ अब उन्होंने अपनी स्टीयरिंग एनडीए के दिग्गज नेताओं की तरफ़ मोड़ दी है. पीके के निशाने पर जेडीयू के नेता अशोक चौधरी हैं, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के क़रीबी माने जाते हैं.
पीके ने भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और मंत्री मंगल पांडेय को लेकर मोर्चा खोल रखा है. ऐसे में सवाल उठता है कि पीके क्यों बिहार के सियासी 'चौधरियों' के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं.
पीके की केजरीवाल मॉडल पॉलिटिक्स
प्रशांत किशोर पूरी तरह केजरीवाल मॉडल पर राजनीति करते नज़र आ रहे हैं. अरविंद केजरीवाल ने सियासी पिच पर उतरने से पहले विपक्ष के नेताओं को भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़े कर अपनी छवि एक ईमानदार नेता और पार्टी की बनाई थी, इसका सियासी लाभ भी उन्हें मिला. अब उसी तर्ज़ पर पीके भी बिहार के उन नेताओं को अपने टारगेट पर ले रखा है, जो अपनी-अपनी पार्टियों के 'चौधरी' यानी मुखिया या फिर चेहरा हैं. इन्हीं नेताओं के इर्द-गिर्द चुनावी ताना-बाना बुना जा रहा है.
पीके हर रोज़ सिर्फ़ एक नया आरोप ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि सबूत के तौर पर दस्तावेज़ दिखाकर सियासी माहौल में बने हुए हैं, जिसके चलते भाजपा और जेडीयू दोनों ही पार्टियां बैकफ़ुट पर खड़ी नज़र आ रही हैं. इसके चलते जेडीयू और भाजपा के अंदर से भी अपने नेताओं के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगी है. बिहार चुनाव के सियासी माहौल के केंद्र में पीके बने हुए हैं.

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