
बिहार के लोगों के लिए खुशखबरी, इन 14 नए रूट्स पर चलेंगी बसें, देखें लिस्ट
AajTak
बिहार और पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों में आने-जाने के लिए 14 नए रूटों पर बसों का परिचालन होगा. इन सभी रूटों पर 10 बसों की आवाजाही के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच सहमति प्रदान की गई है. नए रूटों पर बसों का परिचालन शुरू करने के साथ-साथ अन्य जगहों के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं.
बिहार के साथ-साथ बंगाल के उन यात्रियों के लिए बड़ी खबर आई है जो आज भी बस से यात्रा करना पसंद करते हैं. इन यात्रियों को अब बिहार और पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों में आने-जाने के लिए 45 रूटों पर बसों का परिचालन होगा. इसकी सहमति मिल गई है. इसमें ऐसे 14 रूट हैं, जहां के लिए परमिट का कोटा है लेकिन सभी खाली हैं. इन रूटों पर बसों के परिचालन के लिए बस ओनर से राज्य परिवहन आयुक्त की ओर से 27 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मंगाए गये हैं. आवेदन के बाद 28 जनवरी तक संबंधित सभी जरूरी कागजात कार्यालय में जमा किये जाने हैं.
बस सेवा में वृद्धि को लेकर आयुक्त कार्यालय की ओर से परमिट जारी करने का फैसला ले लिया गया है. नये रूटों पर बसों का परिचालन शुरू करने के साथ-साथ अन्य जगहों के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं ताकि उन रूटों पर भी बसों की संख्या को ज्यादा किया जा सके. ये सेवा पहले से लोगों को मिल रही है, इसलिए परमिट के लिए मिले आवेदनों पर सहमति देने के लिए राज्य परिवहन निगम के प्राधिकार की बैठक होगी जिसमें 14 फरवरी को इस मामले में फैसला लिया जाएगा.
इन रूट्स पर चलेंगी बसें परिचालन के लिए जिन रुट्स का फैसला लिया गया है, उनमें मुजफ्फरपुर-हावड़ा वाया धनबाद, छपरा-सिलीगुड़ी, बांका-सिलीगुड़ी, भागलपुर-कोलकाता वाया दुमका, औरंगाबाद-कोलकाता वाया धनबाद, पटना-दुर्गापुर वाया धनबाद, मोतिहारी-सिलीगुड़ी, छपरा-सिलीगुड़ी, सिवान-सिलीगुड़ी, पूर्णिया-गलगलिया शामिल हैं.
इसके अलावा पूर्णिया से रायगंज भी इस रूट में शामिल है. इन सभी रूटों पर 10 बसों की आवाजाही के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच सहमति प्रदान की गई है. इसके अलावा पटना-हावड़ा, मुजफ्फरपुर-सिलीगुड़ी, बिहारशरीफ-कोलकाता, पटना से सिलीगुड़ी, कटिहार-बलुरघाट, सहरसा-सिलीगुडी़, भागलपुर-रामपुरहाट, दरभंगा-सिलीगुड़ी, मधुबनी-सिलीगुडी़ और भागलपुर-दुर्गापुर आदि रूटों पर भी बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









