
बिहार कांग्रेस संकट में और राहुल गांधी दिल्ली में इमरती छान रहे हैं
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कहा जाता है कि देर आए दुरुस्त आए. पर बिहार विधानसभा चुनावों के मौके पर कांग्रेस जो कर रही है वो ऐसा नहीं है. कई सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां कांग्रेस उम्मीदवारों के साथ ओवरलैप कर रही हैं. इसके लिए राहुल गांधी को कितना जिम्मेदार कहा जा सकता हैं?
कई दशक पहले बॉलिवुड की एक फिल्म में एक ऐसा गीत आया था, जिसमें आज की कांग्रेस संगठन और उसके बड़े नेताओं का प्रतिबिंब नजर आता है. आग लगी हमरी झोपड़िया में, हम गाएं मल्हार... यह पंक्ति उस विडंबना को बखूबी बयां करती है, जहां संकट की आग भड़क रही हो और व्यक्ति फिर भी बेमुरव्वत गीत गा रहा हो. ठीक वैसी ही स्थिति आज बिहार विधानसभा चुनावों के दौर में कांग्रेस पार्टी के साथ नजर आ रही है. एक तरफ पार्टी संकट में है मतलब टिकट बंटवारे पर सरफुट्टौवल, सीट शेयरिंग पर भयंकर बवाल, और महागठबंधन की पार्टियों के साथ आपसी खींचतान मची हुई है. दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पुरानी दिल्ली की एक मशहूर हलवाई की दुकान में जाकर लड्डू बनाना सीख रहे हैं. दिवाली के बहाने घंटेवाला मिठाई दुकान पर इमरती और बेसन के लड्डू बनाने का वीडियो शेयर कर वे जनता से पूछ रहे हैं कि आपका दिवाली कैसी गुजर रही है?
हरियाणा और उत्तर प्रदेश की धरती पर तो वे घूम-फिर रहे हैं, लेकिन बिहार की चुनावी जंग में उनकी उपस्थिति लगभग शून्य है. शुरू में बिहार चुनावों को लेकर इतना उत्साह दिखा रहे थे कि लगता था, राहुल अकेले ही मैदान संभाल लेंगे. आखिर कहां गया वो जोश? क्यों हो गए वे मैदान से बाहर? यह सवाल न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में कौंध रहा है, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने को विवश कर रहा है.
फ्रैंडली फाइट क्या होती है? यह तो शर्म से मुंह छिपाना है
राज्य की 243 सीटों पर एनडीए (बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी-आरवी, हम-एस) ने सीट बंटवारे को सुचारु रूप से निपटा लिया है. जेडीयू और बीजेपी ने 101-101 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं. चिराग पासवान की पार्टी को 29 सीटें मिलीं, और छोटे सहयोगी भी संतुष्ट हैं. वहीं, महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल, वीआईपी) का हाल कुछ और ही है. नामांकन भरने की अंतिम तारीख गुजर चुकी है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला आज तक फाइनल नहीं हुआ. परिणामस्वरूप, कई विधानसभा क्षेत्रों में गठबंधन के घटक दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए हैं.
कम से कम कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार 6 सीटों पर आमने सामने हैं. इसी तरह कम से कम 4 सीटों पर वाम दलों के साथ कांग्रेस के प्रत्याशी भिड़ रहे हैं.जाहिर है कि इन सीटों पर बीजेपी के बढ़िया मौका मिलने वाला है. वैसे भी कोई फाइट फ्रैंडली नहीं होती है. यही कारण है कि एनडीए की ओर से इसे 'महा-डिले-बंधन' करार दिया जा रहा है, जो विपक्षी एकता को कमजोर कर रहा है.
2-कांग्रेस की बिहार इकाई में यह बवाल कहां से शुरू हुआ?

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