
बाल श्रम की सच्चाई: बचपन के नाम पर ज़िंदगी का सौदा, एक साल में भारत में रेस्क्यू किए गए 45000 बच्चे
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भारत में आज भी लाखों बच्चे बचपन की मासूमियत से दूर, बाल श्रम और शोषण का शिकार हैं. हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में 10.1 मिलियन बाल मजदूर हैं और कई राज्यों में बचाव अभियान चलाकर हजारों बच्चों को छुड़ाया गया है. बाल अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई और वैश्विक प्रयास जारी हैं.
भारत में लाखों बच्चे आज भी स्कूल की जगह फैक्ट्रियों और होटलों में काम करने को मजबूर हैं. ये बच्चे सुबह पढ़ने नहीं, बल्कि बर्तन धोने, कपड़े बुनने और दूसरे काम करने के लिए उठते हैं. इन बच्चों में से कई तो तस्करी करके दूर-दराज के इलाकों में लाए जाते हैं.
भारत में फिलहाल करीब 10.1 मिलियन बच्चे बाल मजदूरी कर रहे हैं. 2001 से 2011 के बीच इनमें 2.6 मिलियन की कमी आई, लेकिन यह गिरावट केवल ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिली, जहां आंकड़े 11.4 मिलियन से घटकर 8.1 मिलियन हो गए. वहीं, शहरी क्षेत्रों में स्थिति उलटी रही - यहां बाल श्रम बढ़ा है, और संख्या 1.3 मिलियन से बढ़कर 2 मिलियन पहुंच गई.
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अपराध के आंकड़े
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच बाल श्रम से जुड़े मामलों में 44% की वृद्धि हुई है - 810 से बढ़कर 1,169 तक हो गया है. चाइल्ड लेबर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर में भी 66% की वृद्धि दर्ज की गई - ये 464 से बढ़कर 751 हो गए हैं.
बचाव अभियान और आंकड़े

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