
बाबा की खुलने लगी पोल... भक्तों से एक पैसा नहीं लेते लेकिन शहर-दर-शहर प्रॉपर्टी, महंगी कारें-प्राइवेट आर्मी...
AajTak
अब धीरे-धीरे बाबा की पोल खुल रही है. औलाद नहीं होने की वजह से सूरजपाल सिंह जाटव ने 24 मई 2023 को अपनी सारी संपत्ति नारायण विश्व हरि ट्रस्ट के नाम कर दी थी.
बाबा अपने भक्तों से एक रुपया नहीं लेते थे, लेकिन बाबा का साम्राज्य शहर-दर-शहर फैला हुआ है. भक्तों के बीच ये बाबा कई नाम से जाने जाते हैं- नारायण साकार हरि, विश्व हरि, भोले बाबा... लेकिन इनका असली नाम सूरजपाल सिंह जाटव है. उम्र करीब 58 साल बताई जा रही है.
दरअसल, कथावाचक सूरजपाल सिंह जाटव अलग अंदाज भी लिए जाने जाते हैं. वेश-भूषा देखकर कोई नहीं कह सकता है कि ये बाबा हैं, और कई राज्यों में इनके हजारों भक्त हैं. अब धीरे-धीरे बाबा की पोल खुल रही है. हाथरस वाले हादसे के बाद एफआईआर तो दर्ज हो गई है, लेकिन एफआईआर में बाबा का नाम नहीं है. एफआईआर में नाम न होने के बावजूद हादसे के बाद बाबा फरार है और पुलिस उसे सरगर्मी से तलाश रही है.
देश के कई राज्यों में बाबा का मायाजाल
फिलहाल बाबा के भक्त उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी मौजूद हैं. जो सत्संग में आशीर्वाद लेने पहुंचते थे. सूरजपाल सिंह जाटव एटा जिले से अलग हुए कासगंज के पटियाली के बहादुरनगर गांव के निवासी हैं. वैसे बाबा का अब अपने गांव आना-जाना कम रहता है. लेकिन बहादुरनगर बाबा की जन्मस्थली के रूप में मशहूर है, जहां रोजाना लोगों की बड़ी भीड़ पहुंचती है. यहां बाबा का बड़ा साम्राज्य है.
बहादुरनगर में बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट है, यहां सैकड़ों लोग काम करते हैं. ट्रस्ट के एक सदस्य ने 'आजतक' को बताया कि बाबा के नाम पर यहां 20-25 बीघा जमीन है, जहां खेती होती है. इसके अलावा ट्रस्ट के लोगों का यहां आने वाले भक्तों को कोई दिक्कत न हो, इस काम को देखते हैं. बहादुरनगर ट्रस्ट में बड़ी संख्या में महिला सेवादार भी हैं. उत्तर प्रदेश के नोएडा में बाबा का आश्रम बताया जा रहा है. इसके अलावा सूबे कई राज्यों में भी बाबा के ठिकाने हैं.
दिलचस्प ये भी है कि कथित भोले बाबा अपने भक्तों से कोई दान, दक्षिणा या चढ़ावा नहीं लेते हैं. लेकिन इसके बावजूद उनके कई आश्रम स्थापित हो चुके हैं. उत्तर प्रदेश में कई दूसरे स्थानों पर स्वामित्व वाली जमीन पर आश्रम स्थापित करने का दावा भी किया जा रहा है. खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बाबा के कई एकड़ जमीन पर आश्रम हैं, जहां लगातार सत्संग के कार्यक्रम चलते रहते हैं. बाबा के अनुयायियों में सबसे बड़ा वर्ग अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग का है.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








