
बांग्लादेश में क्या इस्लाम अब राजकीय धर्म नहीं रहेगा?
BBC
पिछले दिनों हिंदुओं के ख़िलाफ़ हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हुई है. देश में तनाव के माहौल के बीच सत्ताधारी पार्टी ने संविधान में बदलाव के संकेत दिए हैं. क्या ये आसान होगा.
माना जा रहा है कि बांग्लादेश की सत्तारूढ़ अवामी लीग सरकार ने 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान की वापसी का फ़ैसला कर लिया है और इसके साथ ही राष्ट्रीय धर्म के तौर पर इस्लाम की मान्यता ख़त्म कर दी जाएगी. ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में लिए जाने की चर्चा है जब देश में ईशनिंदा की अफ़वाहों को लेकर हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं.
13 अक्टूबर से शुरू हुए ऐसे हमलों में अब तक आठ लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों हिंदुओं के घर और दर्जनों मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं.
कट्टरपंथी इस्लाम समर्थकों ने अवामी लीग सरकार को धमकी देते हुए कहा है कि अगर 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान को वापस लाने के लिए प्रस्तावित विधेयक को संसद में पेश किया तो और अधिक हिंसा होगी. साल 1988 में सैन्य शासक एचएम इरशाद ने इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म घोषित किया था.
यहां तक कि ढाका शहर के पूर्व मेयर सईद खोकोन जैसे कुछ अवामी लीग के नेताओं ने भी सूचना मंत्री मुराद हसन की उस घोषणा का विरोध किया है जिसमें उन्होंने कहा कि बांग्लादेश एक धर्मनिरपेक्ष देश है और राष्ट्रपिता शेख़ मुजीबुर्रहमान द्वारा बनाए गए 1972 के संविधान की देश में वापसी होगी.
सईद खोकोन ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ''ये आग में धी का काम करेगा.''













