
बंगाल में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री होंगी यूनिवर्सिटी चांसलर, जानिए कितना वैधानिक है फैसला
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नये नियम के तहत स्टेट यूनिवर्सिटी के चांसलर की भूमिका मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा नामित शिक्षाविद् संभालेंगे. राज्यपाल केवल यूनिवर्सिटी में उसी तरह विजिटर रहेंगे जैसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति होते हैं.
पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए फैसला किया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में अब राज्यपाल की जगह मुख्मंत्री चांसलर का पद संभालेंगी. गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है जिसकी जानकारी प्रदेश के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने दी.
क्या हैं इस फैसले के मायने राज्य सरकार का यह फैसला राज्यपाल की शक्तियों को कम करने के इरादे से लिया गया है. नये नियम के तहत स्टेट यूनिवर्सिटी के चांसलर की भूमिका मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा नामित शिक्षाविद् संभालेंगे. राज्यपाल केवल यूनिवर्सिटी में उसी तरह विजिटर रहेंगे जैसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति होते हैं.
लंबे समय से जारी है खींचतान बीते कुछ समय से पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच खींचतान जारी थी. ममता सरकार यह आरोप लगा रही थी कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ राज्य सरकार की सहमति के बगैर कुलपतियों की नियुक्तियां कर रहे हैं. कुछ महीने पहले, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिक्षामंत्री बसु ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर फाइलें अटकाकर रखने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि राज्यपाल के रवैये से शिक्षा मंत्रालय के कामकाज में बड़ी मुश्किलें आ रही हैं.
इसके ठीक विपरीत राज्यपाल द्वारा दिसंबर में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के वाइस चांसलर्स के लिए बुलाई गई मीटिंग में 11 यूनिवर्सिटी के चांसलर ने हिस्सा नहीं लिया था. राज्यपाल ने इसपर रोष भी जताया था. राज्यपाल ने मीटिंग में खाली पड़ी कुर्सियों की तस्वीर ट्वीट कर इसे गंभीर समस्या बताया था जिसके कुछ समय बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया था. ममता ने उनपर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि वह उनके ट्वीट से परेशान हो गई हैं.
राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच लगातार जारी खींचतान के बाद यह साफ दिखाई दे रहा था कि जल्द ही ममता सरकार राज्यपाल की चांसलर की कुर्सी छीन सकती है. कैबिनेट में इसपर फैसला ले लिया गया है और अब जल्द ही बंगाल विधानसभा में इसे लेकर संशोधन बिल पेश किया जाएगा.
कितना वैधानिक है फैसला वैधनिक संरचना के तहत, राज्य का राज्यपाल ही सभी स्टेट यूनिवर्सिटी का चांसलर होता है. आजादी के बाद जब भी किसी राज्य के विश्वविद्यालय की स्थापना की जाती है, तो ऐसा राज्य विधानसभा द्वारा पारित कानून की मदद से किया जाता है. इस कानून में उस राज्य के राज्यपाल को अपना पदेन चांसलर बनाने का प्रावधान भी शामिल है. हालांकि, राज्य विधानसभा इसमें बदलाव कर सकती है.

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