
प्रशांत किशोर क्या BJP के भूमिहार-ब्राह्मण वोटों में सेंध लगा रहे हैं? इन तीन घटनाओं पर गौर करिए
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प्रशांत किशोर को विपक्ष पहले बीजेपी की बी टीम कहा करता था. पर आज की तारीख में किशोर एनडीए के लिए सबसे बड़ा खतरा बन कर उभर रहे हैं. गृहमंत्री अमित शाह के बेगुसराय जाने का मतलब है कि सवर्णों के वोट को लेकर बीजेपी गंभीर हो गई है.
बिहार की राजनीति जातिगत समीकरणों का खेल मैदान रही है. पिछड़ी और अति पिछड़ी राजनीति के केंद्र में आने के चलते सवर्ण जातियां भूमिहार ब्राह्मण (लगभग 2.86% आबादी) और ब्राह्मण (3.65%) का महत्व पिछले कुछ दशकों में कम होता गया. पर जब से फैसला एक परसेंट से भी कम वोटों का रह गया है तब से सवर्ण वोट सभी दलों के लिए निर्णायक हो गए हैं.
अमूमन मिथलांचल का एरिया छोड़ दें तो ब्राह्मण-भूमिहार मिलकर ही वोट करते हैं. लेकिन, बिहार के अलग-अलग इलाकों में भूमिहार जाति का यादव, राजपूत और कुशवाहा–कुर्मी जातियों के साथ राजनीतिक दुश्मनी रही है. ये समुदाय रोहतास, भोजपुर, बेगूसराय, गया और समस्तीपुर जैसे जिलों में BJP का मजबूत वोट बैंक हैं. 2020 विधानसभा चुनावों में NDA ने इन क्षेत्रों में 70-80% समर्थन हासिल किया. लेकिन 2025 चुनावों से पहले, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने इन वोटों में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई है.
PK खुद ब्राह्मण पांडे उपनाम धारी, रोहतास के कोनार गांव से हैं, और उनकी 'बिहार बदलाव यात्रा' ने ऊंची जातियों के युवाओं, पेशेवरों और असंतुष्ट वोटरों को आकर्षित किया है. हाल ही में एक प्रमुख राष्ट्रीय चैनल के सर्वे के अनुसार भूमिहार-ब्राह्मण वोटों में NDA का समर्थन 65% से गिरकर 52% रह गया है. जबकि 18-22% युवा PK की ओर झुक रहे हैं. यह केवल आंकड़े ही नहीं बता रहे हैं, बिहार में पिछले दिनों हुई कुछ राजनीतिक घटनाएं भी इसी ओर इशारा कर रही हैं.
1-पीके की बेगूसराय रैली में उमड़ी भीड़
बेगूसराय बिहार का एक ऐसा जिला है, जहां जातिगत समीकरण NDA के पक्ष में रहता है. यहां भूमिहार लगभग 20% के करीब हैं तो ब्राह्मण करीब 10% हैं . जाहिर है कि कुल 30 प्रतिशत वोट किसी भी दल के लिए निर्णायक होता है. 2020 चुनावों में भाजपा ने यहां की कुल सात में 4 सीटें जीत ली थीं. गिरिराज सिंह जैसे नेता यहां का केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व करते हैं. लेकिन PK, जो खुद ब्राह्मण पृष्ठभूमि से हैं बीजीपी के इस किले पर सेंध लगाने के लिए तैयार हैं. 10 सितंबर को बछवाड़ा में PK की 'बदलाव सभा' ने स्थानीय राजनीति को हिला कर रख दिया. रैली का आयोजन बछवाड़ा प्रखंड के मैदान में हुआ, जहां PK ने 2 घंटे से ज्यादा भाषण दिया. भारी भीड़ जुटी जिसमें ज्यादातर युवा और भूमिहार-ब्राह्मण समाज के लोग शामिल थे.
PK ने NDA पर तीखा प्रहार किया.उन्होंन कहा कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह हैं, और भाजपा उनका कवच-कुंडल बनी हुई है. बेगूसराय जैसे जिलों में फैक्टरियां क्यों नहीं? पलायन क्यों? उन्होंने 'राइट टू रिकॉल' विधेयक और 50 लाख रोजगार का वादा दोहराया, जो ऊंची जातियों के शहरी युवाओं को आकर्षित करता है. रैली में PK ने कहा, मोदी जी ने 2014 में वादा किया था कि बिहार विकसित होगा, लेकिन 10 साल बाद भी हम मजदूरी के लिए दिल्ली जा रहे हैं. जाहिर है कि प्रशांत किशोर की बातें युवाओं को लुभा रही हैं. भीड़ में नारे लगे बदलाव लाओ, बिहार बचाओ. लेकिन विवाद भी हुआ. स्थानीय भाजपा नेता ने इसे वोट-कटवा रैली कहा, जबकि PK समर्थकों ने इसे भूमिहार जागरण बताया.

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