
प्रतापगढ़: SDM की पिटाई से नायब नाजिर की मौत, एफआईआर दर्ज, परिजनों ने किया हंगामा
AajTak
नगर कोतवाली के विवेक नगर निवासी सुनील कुमार शर्मा लालगंज तहसील में नायब नाजिर के पद पर कार्यरत थे. 31 मार्च की रात सुनील ने एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी.
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की लालगंज तहसील के नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की शनिवार देर रात जिला अस्पताल में मौत हो गई. उसे 30 मार्च की रात तहसील परिसर में बुरी तरह पीटा गया था जिसके बाद सुनील ने एसडीएम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए तहरीर थाने में दी थी.
नायब नाजिर की मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा काटा. डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद हंगामा शांत हुआ. सुनील की मौत के बाद शनिवार देर रात लालगंज कोतवाली में आरोपित एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया. उधर डीएम ने एसडीएम को हटाकर चार्ज दूसरे को दे दिया है.
क्या है पूरा मामला? पिछले दिनों लालगंज तहसील के नायब नाजिर सुनील शर्मा ने एक आरोप लगाया था कि एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह ने 30 मार्च की रात उनकी पिटाई की थी. दूसरे दिन उसकी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई लेकिन एडीएम के निर्देश पर उसकी चोटों का मेडिकल कराया गया. बाद में उन्हें लालगंज ट्रामा सेंटर में भर्ती करा दिया गया.
जिला ट्रेड यूनियन कौंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा ने शनिवार को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि सुनील शर्मा की हालत बिगड़ गई है लेकिन उसे लालगंज से रेफर नहीं किया जा रहा है. जिसके बाद देर शाम उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया.
वहीं, मृतक सुनील शर्मा के बेटे सुधीर शर्मा का आरोप है कि 30 मार्च को उनके पिता सरकारी आवास में थे. रात 9 बजे अचानक उपजिलाधिकारी लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह अपने तीन साथियों के साथ घर में घुस आए और जमकर उनकी पिटाई कर दी. मृतक के बेटे ने का कि उनके पिता सिर्फ 6 हजार ईंटों की मांग कर रहे थे, ताकि तहसील कैम्पस की बाउंड्री बनवाने का कार्य हो सके. उन्होंने कहा कि ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह और उसके साथियों की पिटाई के कारण नायब नाजिर सुनील शर्मा की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान सुनील शर्मा की मौत हो गई.
परिजनों के हंगामे के बाद जिलाधिकारी नितिन बंसल ने आरोपी एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह को लालगंज तहसील से हटा दिया है. उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया. डीएम ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं. पहले इस मामले की जांच सीआरओ कर रहे थे, लेकिन वह घायल नायब नाजिर का बयान नहीं दर्ज कर सके.

नागर विमानन मंत्रालय ने घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी सीमा (Fare Caps) को वापस लेने का फैसला किया है. पिछले साल इंडिगो (IndiGo) एयरलाइंस के संकट के बाद टिकटों की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह पाबंदी लगाई थी. हालांकि एयरलाइंस कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे जिम्मेदारी से किराए तय करें और यात्रियों के हितों का ध्यान रखें।

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक दबाव के चलते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने समेत मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी का एक हिस्सा 6 महीने के लिए टालने का फैसला किया है. हालांकि, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को पूरी सैलरी मिलेगी. वहीं सरकार ने मेडिकल स्टाफ, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं सहित कई वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी की है. विधायक योजनाओं की सीमा भी बढ़ाई गई है. सरकार का कहना है कि हालात सुधरने पर रोकी गई राशि वापस दी जाएगी.

झारखंड के लातेहार में दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा बरवाटोली गांव के पास हुआ. घायलों को बालूमाथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दो की हालत नाजुक होने पर रिम्स रेफर किया गया. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है.

मध्य-पूर्व में जारी जंग का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. तेल कीमतें 70 से बढ़कर 110 डॉलर पार पहुंचीं, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे हुए और महंगाई का दबाव बढ़ा. ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट ने सप्लाई प्रभावित की. इसका असर ट्रांसपोर्ट, रुपया, सरकारी खर्च और आम लोगों की बचत पर पड़ रहा है.

बादशाह ने विवादित 'टटीरी' गाने पर माफी मांगी, लेकिन पुलिस जांच जारी है. शिबास कबिराज ने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई होगी. महिला आयोग ने भी नोटिस जारी किया है. गन कल्चर वाले गानों पर भी सख्ती की बात कही गई है. इसी बीच हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध और रंगदारी कॉल्स रोकने के लिए 'अभेद्य' ऐप लॉन्च किया.

लेबनान के युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए आज तक के वरिष्ठ पत्रकार अशरफ वानी ने बताया कि जंग सिर्फ गोलियों और धमाकों की नहीं, बल्कि डर, जिम्मेदारी और सच के बीच संतुलन की लड़ाई भी है. हर दिन मौत के साये में काम करते हुए उन्होंने तबाही, विस्थापन और इंसानी पीड़ा को करीब से देखा. ईद के दिन भी रिपोर्टिंग जारी रही. यह अनुभव सिर्फ कवरेज नहीं, बल्कि ऐसे सच का गवाह बनने की जिम्मेदारी थी- जहां हर पल जिंदगी और मौत के बीच फैसला लेना पड़ता है.







