
पीएम मोदी की पहल पर जी-20 में शामिल होगा अफ्रीकन यूनियन? जानिए क्या हैं इसके मायने
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भारत में अगले हफ्ते जी-20 समिट होना है. भारत ने अफ्रीका यूनियन को जी-20 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है. भारत के इस प्रस्ताव पर जी-20 में शामिल कई देशों ने समर्थन किया है. हालांकि कुछ ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
मशहूर सिंगर शकीरा का गाना आया था... दिस टाइम ऑफ अफ्रीका (वाका वाका). 2010 में आए इस गाने ने दुनियाभर में धूम बचाई थी. अब 2023 चल रहा है और यह वास्तव में अफ्रीका का समय है. दरअसल, अफ्रीका संघ (AU) को जी-20 में शामिल करने की मांग उठ रही है. भारत ने भी इस मांग का समर्थन किया है. हालांकि, भारत के समर्थन करने के पीछे कई वजह भी हैं. भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर समावेशिता और विविधता का समर्थन करने वाले देश के रूप में स्थिति को और मजबूत करता है.
अफ्रीका को जी-20 में शामिल करना क्यों जरूरी?
जानकारों का मानना है कि अफ्रीका में चीन का प्रभाव बढ़ा है. ऐसे में भारत का कदम अफ्रीकी महाद्वीप पर चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए काफी अहम है. भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने इसे लेकर कहा, ''प्रधानमंत्री बहुत स्पष्ट थे कि हमें ऐसा करना ही होगा, आखिरकार उनमें 55 देश शामिल हैं और G20 को और अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है. जी-20 जी-7 की तरह नहीं है. इसमें विकसित और विकासशील दोनों देश या उभरते देश शामिल हैं. अफ्रीका को देखें तो सबसे तेजी से विकास करने वाले 12 देशों में से छह अफ्रीका से हैं. इसलिए, अगर दुनिया को उस तरफ बढ़ना है तो आपको उन्हें एक हिस्सा बनाने की जरूरत है. अगर इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाना है, तो आपको इन्हें जी20 का हिस्सा बनाना होगा.'' भारत और अफ्रीका के बीच गहरे संबंध दूसरा भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार और शिक्षा से लेकर हेल्थ और तकनीकी तक सहयोग का एक लंबा इतिहास है. जी-20 में अफ्रीकी यूनियन को शामिल करने के समर्थन की पहल दोनों देशों के बीच साझेदारी का भी प्रतीक है. हालांकि, यह प्रतीकात्मक से कहीं अधिक रणनीतिक है. यह पैन-अफ्रीकी ई-नेटवर्क परियोजना और भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम में भारत की भूमिका को प्रतिबिंबित करता है, जो दोनों अफ्रीकी देशों के साथ संसाधनों और ज्ञान को साझा करने की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं.
भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और भूराजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उसके द्वारा G20 में अफ्रीका का समर्थन करना काफी महत्व रखता है. ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ ब्रिक्स सदस्य के रूप में, भारत का समर्थन अन्य देशों को प्रभावित करने की संभावना है. जी20 में अफ्रीकी संघ के प्रवेश के लिए भारत का समर्थन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की नजर में ऐतिहासिक क्षण है. यह वैश्विक नेता के रूप में भारत की स्थिति को भी बढ़ाता है.
भारत की अपील से सहमत कई देश G20 के अधिकांश सदस्यों ने सदस्यता के लिए अफ्रीकी यूनियन की बोली का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है. भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे दिल से इस प्रयास का समर्थन किया, जिससे अफ्रीकी यूनियन और अफ्रीका के साथ भारत की दीर्घकालिक साझेदारी की पुष्टि हुई. जी-20 सदस्य देशों में से कई ने सार्वजनिक रूप से AU की एंट्री का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की.
G20 के लिए AU कितना जरूरी? समर्थकों का तर्क है कि AU के शामिल होने से जी20 अधिक प्रतिनिधि बन जाएगा और इससे इसकी विश्वसनीयता बढ़ेगी. जी-20 देशों में अभी दुनिया की 65% आबादी रहती है. अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह 80% नागरिकों की आवाज बन जाएगा.

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