
पाकिस्तान से तनाव के बीच बॉर्डर से सटे गांवों में कैसा है माहौल, पढ़ें- जैसलमेर से ग्राउंड रिपोर्ट
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जैसलमेर के मुराद की ढाणी में कई ग्रामीणों ने कहा कि पहलगाम हमले के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि अगर युद्ध हुआ तो इससे पूरे इलाके में लोगों को काफी मुश्किलें आएंगी.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. पाकिस्तान प्रयोजित आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए भारत ने सिंधु जल समझौता सस्पेंड कर दिया है. इसके अलावा पाकिस्तान से भारत आए लोगों को भी वापस भेजा जा रहा है. लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत अब पाकिस्तान के खिलाफ आर-पार की लड़ाई की तरफ बढ़ रहा है. क्या पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए और ज्यादा सख्त कदम उठाए जाने बाकी हैं.
जैसलमेर से गांवों में कैसा माहौल
इंडिया टुडे ने भारत के पश्चिमी क्षेत्र जैसलमेर के कुछ हिस्सों का दौरा किया, जिसने 1971 में लोंगेवाला की जंग को देखा था, जिसमें गमनेवाला और मुराद की ढाणी गांव शामिल थे, ताकि वहां के माहौल का अंदाजा लगाया जा सके.
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मुराद की ढाणी में कई ग्रामीणों ने कहा कि पहलगाम हमले के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि अगर युद्ध हुआ तो इससे पूरे इलाके में लोगों को काफी मुश्किलें आएंगी. स्थानीय निवासी मोम्बे खान ने कहा, 'जब युद्ध होता है तो नुकसान होता है, जनता का, सबका. युद्ध न हो तो ठीक है.' उन्होंने कहा कि अगर गलत काम करने वाले को सजा मिले तो ठीक है, जिसने यह आतंकी हमला किया है, उसे सजा मिलनी चाहिए.
जंग के बाद छोड़ना पड़ा गांव

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