
पाकिस्तान-सऊदी समझौता नया नहीं... 2015 में राहील शरीफ के नेतृत्व में 34 देशों ने बनाया था इस्लामी सैन्य गठबंधन, जो हो गया फेल
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पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बुधवार को हुए सैन्य समझौते की हर तरफ चर्चा है. लेकिन यह पहला ऐसा मौका नहीं है जब अरब-इस्लामिक देश मिलकर कोई डिफेंस डील कर रहे हैं. इससे पहले भी 2015 में सऊदी की पहल पर पाकिस्तान और 40 से ज्यादा देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन हुआ था. पाकिस्तानी जनरल राहील शरीफ उसके पहले कमांडर भी बने. लेकिन बाद में यह गठबंधन पूरी तरह निष्क्रिय साबित हुआ.
पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए अब दूसरे मुल्कों के सामने हाथ फैला रहा है. इसी कड़ी में बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील की है. इस डील को 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' नाम दिया गया है. इसके तहत किसी भी एक देश पर हमला, दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. समझौते में कहा गया है कि दोनों देश इसके जरिए रक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे, संयुक्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित करेंगे और किसी भी संभावित हमले से बचाव के साझा उपाय खोजने में एक-दूसरे की मदद लेंगे. हालांकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह सैन्य समझौता कोई नई बात नहीं है, बल्कि एक दशक पहले भी ऐसे प्रयास हो चुके हैं.
दस साल पहले बना इस्लामी गठबंधन
साल 2015 में सऊदी अरब की महत्वाकांक्षा और पाकिस्तान के समर्थन के साथ एक इस्लामी सैन्य गठबंधन बनाया गया था. इस गठबंधन का नेतृत्व पाकिस्तानी जनरल राहील शरीफ ने किया था. गठबंधन में 34 मुस्लिम देश शामिल थे, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर 42 हो गई थी. इसका मकसद आतंकवाद से लड़ना था, लेकिन यह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया. अब एक बार फिर दोनों के बीच एक सैन्य समझौता हुआ है. लेकिन इस बार इसे 'इस्लामी सैन्य गठबंधन' का नाम नहीं दिया गया है.
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पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री और शहबाज शरीफ के भाई नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने तब सऊदी अरब की तरफ से प्रस्तावित इस्लामी सैन्य गठबंधन का समर्थन किया था. इस गठबंधन को Islamic Military Counter Terrorism Coalition यानी IMCTC कहा जाता है. यह गठबंधन 34 देशों के साथ बनाया गया था, लेकिन बाद में सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 42 हो गई.
सऊदी की पहल, PAK का समर्थन

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