
न कोई बैडलक, न निगेटिवटी बस लाभ ही लाभ... फिर भी शॉपिंग शुक्रवार का दिन क्यों बन जाता है 'Black Friday'
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ब्लैक फ्राइडे 2025 अमेरिका से शुरू होकर अब विश्वव्यापी शॉपिंग महापर्व बन चुका है, जो क्रिसमस की खरीदारी की शुरुआत करता है. यह दिन भारी छूट और बचत का प्रतीक है, जिसका इतिहास फिलाडेल्फिया के ट्रैफिक जाम से जुड़ा है.
साल 2025 अपने आखिरी दौर में है. साइबेरिया की ठंडी हवाओं से धरती की पश्चिमी दिशा जमने सी लगी है और देवदार के घने जंगलों से क्रिसमस कैरल की धुन सुनाई देने लगी है. यानी शुरू हो गया है क्रिसमस के लिए खऱीदारी का दौर.
...लेकिन अभी बात क्रिसमस की नहीं है, बात है इसकी खरीदारी से जुड़े एक बड़े रिचुअल की. ऐसा रिवाज जो नवंबर के आखिरी हफ्ते में आता है. सीधे-सीधे कहें तो थैंक्सगिविंग गुरुवार के बाद वाला शुक्रवार का दिन, जिसके बाद से क्रिसमस की खरीदारी शुरू होती है, लेकिन इससे पहले मिलता है वो खास मौका जब आप शॉपिंग में बड़ी-बड़ी और भारी छूट पा सकते हैं. यानी उम्मीद से परे बचत. महाबचत वाला यह दिन दुनिया भर में ब्लैक फ्राइडे नाम से मशहूर है.
ब्लैक फ्राइडे पढ़ या सुनकर आप ऐसा मत सोच लीजिएगा कि यह कोई निगेटिव टर्म है या फिर किसी बैडलक से जुड़ा दिन. असल में यह दिन आर्थिक तौर पर खुशी के रूप में देखा जाता है. असल में जब बात अर्थव्यवस्था की होती है तब वहां खराब दौर का सूचक 'लाल रंग' होता है, जबकि काला रंग अच्छी बिक्री, सेहतमंद मुनाफा और खरीदारी का होता है.
क्यों शॉपिंग से जुड़ा है ब्लैक फ्राइडे साल में सिर्फ एक बार आने वाले इस मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोग अपनी नींद कुर्बान करके, घंटों लाइन में खड़े होकर, सिर्फ भारी छूट चाहते हैं और यह इंतजार और चाहत ही कहलाती है ब्लैक फ्राइडे (Black Friday Sale 2025). यह वह तारीख है जिसके आते ही सेल का तूफानी दौर आता है और मिनटों में दुकानों की शेल्फ खाली कर देता है.
यह शब्द जिसे आज हम 'बचत' और 'बम्पर डील' से जोड़ते हैं, हालांकि शुरुआत में इसका मतलब नेगिटिव ही था? खुशियों और मुनाफे के इस दिन के नाम के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. यह एक जमाने फिलाडेल्फिया की सड़कों पर लगे भयानक ट्रैफिक जाम से आया है.
ब्लैक फ्राइडे सेल की जड़ें अमेरिका से जुड़ी हैं. अमेरिका में थैंक्सगिविंग एक बड़ा त्योहार होता है, जिसे नवंबर के चौथे गुरुवार को मनाया जाता है. इसके तुरंत अगले दिन लोग छुट्टी मोड में होते हैं और क्रिसमस की तैयारियों की शुरुआत करते हैं. दुकानदारों ने इसे खरीदारी शुरू करवाने का सही मौका माना और बड़े-बड़े डिस्काउंट देने लगे. धीरे-धीरे यह दिन साल की सबसे बड़ी शॉपिंग डेट बन गया.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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