
नोएडा में फर्जी पुलिस एजेंसी का भंडाफोड़, सामने आया ह्यूमन राइट्स-सेवा और सियासी रसूख का खेल
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इस ठगी रैकेट के केंद्र में दो संगठन थे जिनके नाम असली पुलिस एजेंसियों जैसे लगते थे. एक का नाम इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो और दूसरा नेशनल ब्यूरो ऑफ सोशल इन्वेस्टिगेशन एंड सोशल जस्टिस है. ये लोग उन लोगों से पैसे ऐंठते थे, जिन पर अपराध या भ्रष्टाचार के आरोप थे.
नोएडा में एक फर्जी 'अंतरराष्ट्रीय दूतावास' के बाद अब पुलिस ने पश्चिम बंगाल के छह लोगों को एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है. इस ठगी के खेल के मास्टरमाइंड पिता-पुत्र की जोड़ी बिभास चंद्र अधिकारी और अर्घ्या अधिकारी हैं जिन्होंने बॉलीवुड फिल्मों जैसा जाल बिछाया था.
इस ठगी रैकेट के केंद्र में दो संगठन थे जिनके नाम असली पुलिस एजेंसियों जैसे लगते थे. एक का नाम इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो और दूसरा नेशनल ब्यूरो ऑफ सोशल इन्वेस्टिगेशन एंड सोशल जस्टिस है.ये लोग उन लोगों से पैसे ऐंठते थे, जिन पर अपराध या भ्रष्टाचार के आरोप थे. ये गिरोह समन जारी करता था और पीड़ितों को कोलकाता और नोएडा के अपने कार्यालयों में बुलाता था. नोएडा में इनका ऑपरेशन हाल ही में शुरू हुआ था.
रसूख का कॉकटेल
सफेद धोती-कुर्ता और 'पड़ोसन' फिल्म के सुनील दत्त जैसी मूंछों में बिभास चंद्र अधिकारी एक विशिष्ट बंगाली भद्रलोक की छवि बनाते थे. उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल के मुताबिक वो बिरभूम जिले के कृष्णापुर में अपने 'आश्रम' में धार्मिक प्रवचन देते थे, कॉलेज चलाते थे, सामाजिक आयोजनों में हिस्सा लेते थे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) व बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ उठते-बैठते थे.
उनके पास बिरभूम में एक आयुर्वेदिक कॉलेज, आयुर्वेदिक दवा फैक्ट्री, बी.एड. कॉलेज, डी.एड. कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज जैसी संस्थाएं हैं.
उत्तर प्रदेश पुलिस की रेड में फर्जी दस्तावेज, सील और वेबसाइट सामग्री बरामद हुई, जो वैश्विक पहुंच का दावा करती थी. इनकी वेबसाइट पर दावा था कि उनके कार्यालय यूके और अमेरिका में हैं. यूपी पुलिस के बयान के अनुसार, गिरोह ने इंटरपोल, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन, 'यूरेशिया पोल' और 'एशिया पोल' से जुड़ाव का दावा किया. संगठन ने यह भी कहा कि उनके कार्यालय भारत के हर राज्य में हैं.

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