
नेपाल में तख्तापलट पर आया चीन का पहला बयान, 'दोस्त' ओली के नाम पर साधी चुप्पी!
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चीन ने नेपाल में जारी अराजकता पर पहली बार बयान दिया है. उसने सभी पक्षों से घरेलू मुद्दों को उचित तरीके से सुलझाने की बात कही है. हालांकि, प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे पर चुप्पी साध ली.
नेपाल में जारी अराजकता और तख्तापलट को लेकर पहली बार चीन का बयान सामने आया है. बुधवार को चीन ने नेपाल के सभी पक्षों से घरेलू मुद्दों को उचित तरीके से निपटाने, सामाजिक व्यवस्था और स्थिरता बहाल करने का आग्रह किया.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में नेपाल की स्थिति पर पहली बार टिप्पणी करते हुए कहा, 'चीन और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से दोस्ताना पड़ोसी वाला रिश्ता रहा हैं. हमें उम्मीद है कि नेपाल के सभी वर्ग घरेलू मुद्दों को उचित ढंग से संभालेंगे, सामाजिक व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को जल्द से जल्द बहाल करेंगे.'
नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर शुरू हुए जेन-जी आंदोलन की वजह से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा है और सरकार गिरा दी गई है. लेकिन लिन ने ओली के इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की.
ओली को चीन समर्थक नेता माना जाता है. उन्होंने चीन के साथ नेपाल के रणनीतिक संबंधों को गहरा करने में अहम भूमिका निभाई है.
ओली हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे. इस दौरे में उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर विजय की याद में 3 सितंबर को आयोजित चीनी सैन्य परेड में भी हिस्सा लिया था.
ओली के चीन से लौटने के कुछ दिनों बाद ही नेपाल में युवाओं ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से तंग आकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन के ओली सरकार के हालिया फैसले ने आग में घी डालने का काम किया और आंदोलन भड़क उठा.

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