
'निज्जर कोई संत नहीं था, सबूत नहीं दिए तो...', अपने PM को लेकर ऐसी बातें कह रहा कनाडा का मीडिया
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कनाडा की मीडिया में ट्रूडो पहले ही आलोचनाओं का शिकार हो रहे थे. अब भारत पर उनके आरोपों के बाद कनाडा का मीडिया कह रहा है कि ट्रूडो अगर सच कह रहे हैं तो उन्हें सबूत पेश करना चाहिए. दोनों देशों के बीच तनाव से न तो पीएम मोदी और न ही ट्रूडो को परेशानी हो रही है, बल्कि दोनों देशों के आम लोग परेशान हो रहे हैं.
कनाडा और भारत के बीच खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का मामला गरमाया हुआ है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बिना कोई सबूत दिखाए सोमवार को कह दिया कि निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों का हाथ था. ट्रूडो ने यह आरोप ऐसे वक्त में लगाए हैं जब घरेलू मुद्दों पर देश में उन्हें जबरदस्त तरीके से घेरा जा रहा है और पोल्स में वो अपने विपक्षियों से लगातार पिछड़ रहे हैं. कनाडा की मीडिया में कहा जा रहा है कि देश में तेजी से गिरती लोकप्रियता के बीच ट्रूडो ने यह मुद्दा उठाया है और अगर वो इसे सही साबित नहीं कर पाए तो घरेलू और वैश्विक पटल पर बहुत बदनामी होगी. 'अगर आरोप साबित नहीं कर पाए तो बड़ी बदनामी होगी'
कनाडाई मीडिया का एक बड़ा वर्ग कह रहा है कि ट्रूडो ने पोल्स में गिरती रैंकिंग और अपनी घरेलू राजनीति को साधने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करने में जल्दबाजी दिखाई है.
कनाडा के प्रमुख अखबार नेशनल पोस्ट ने अपने एक संपादकीय में लिखा, 'यह याद रखना जरूरी है कि ट्रूडो ने जो आरोप लगाए हैं, उसे साबित किया जाना बाकी है. कनाडा के लोगों को वो अब तक कोई सबूत दिखाने में नाकाम रहे हैं.'
नेशनल पोस्ट ने आगे लिखा, 'अगर ऐसी बात सामने आती है कि ट्रूडो ने इस तूफान को बिना किसी सबूत के खड़ा किया है तो यह घरेलू और वैश्विक प्रभाव के लिए शर्मनाक बात होगी.'
नेशनल पोस्ट ने Angus Reid इंस्टिट्यूट की एक हालिया पोल का हवाला दिया है जिसमें ट्रूडो को महज 33% अप्रूवल रेटिंग मिली है जबकि 63% लोगों ने उन्हें नापसंद किया है. ट्रूडो की सरकार वर्तमान ने 24 सांसदों वाले न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी से समर्थन से सत्ता में बनी हुई है. इस पार्टी के मुखिया जगमीत सिंह को खालिस्तान समर्थन माना जाता है.
'भारत आरोपों पर चुप नहीं बैठने वाला'

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