
नाबालिगों में बढ़ती जा रही क्राइम की प्रवृत्ति, 10 आरोपियों में से 9 मिलते हैं दोषी
AajTak
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि देश में नाबालिगों में आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. 2020 में नाबालिगों के खिलाफ करीब 30 हजार क्रिमिनल केस दर्ज किए गए थे, जिनमें 35 हजार से ज्यादा को गिरफ्तार किया गया था.
लखनऊ... उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर और राजधानी भी. 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां 28 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. भारत का 11वां सबसे घनी आबादी वाला शहर लखनऊ ही है. लखनऊ को नवाबी ठाठ-बाठ के लिए जाना जाता है. कारण है कि यहां 18वीं और 19वीं सदी में नवाबों ने राज किया है.
लेकिन, आज यही लखनऊ किसी और कारण से चर्चा में बना हुआ है. इस चर्चा का कारण एक 16 साल का लड़का है, जिसने अपनी मां की हत्या कर दी. हत्या भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि उसकी मां ने उसे PUBG खेलने से मना कर दिया था. अभी तक तो यही कहा जा रहा है.
पुलिस का कहना है कि नाबालिग बेटे को PUBG खेलने की लत है, मां ने रोकटोक की, तो उसे गुस्सा आ गया और आधी रात को अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल निकालकर मां के सिर पर गोली मार दी. मां की वही मौत हो गई. मां की हत्या करने के बाद बेटे को बुरा भी नहीं लगा. उसने अपने दोस्तों को घर बुलाया. पार्टी की. रात में ही फुकरे मूवी भी देखी. उसकी एक छोटी बहन भी थी, जिसे उसे डरा-धमकाकर चुप करा दिया था. मां के शव से बदबू आने लगी तो रूम फ्रेशनर छिड़क दिया. आखिरकार बात बाहर आ गई और उसकी करतूत सबके सामने आ गई.
फिलहाल पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. भारत में नाबालिगों को आमतौर पर जेल की सजा नहीं होती है, लेकिन कुछ जघन्य मामलों में कैद हो सकती है.
ये भी पढ़ें-- PUBG हत्याकांड: 'दरवाजा खोलकर बार-बार चेक करता रहा, मां की मौत हुई या नहीं...', दिल दहला देंगी आरोपी बेटे की ये बातें
भारत में केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) अपराध का लेखा-जोखा रखती है. इसकी सबसे ताजा रिपोर्ट 2020 तक की है. नाबालिगों में अपराध की प्रवृत्ति के आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









