
दोस्ती, मुलाकात, फिर घर में एंट्री... डेटिंग ऐप्स के हुए शिकार, 4 सनसनीखेज वारदात
AajTak
इंटरनेट के बढते प्रसार के साथ साइबर क्राइम के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें डेटिंग और मैरिज ऐप्स के जरिए लोगों को फंसाने और उसने लूटपाट करने के मामले भी बहुत सामने आ रहा है. पुणे पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जो दोस्ती करके पीड़ित के घर जाती. उसे नशिला ड्रिंक देकर लूट लेती.
पुणे के रहने वाले सचिन और सपना (बदला हुआ नाम) एक डेटिंग ऐप एडवेंचर सीकिंग पर एक-दूसरे से मिले. प्यार की तलाश में भटक रहे सचिन को लगा कि सपना उसके लिए परफेक्ट रहेगी. कुछ दिनों की बातचीत के बाद सपना ने अपना नंबर दिया, जिसके बाद टेलीग्राम पर दोनों की अंतरंग बातचीत होने लगी. दोनों अपने प्राइवेट फोटो भी एक-दूसरे को भेजने लगे. फिर एक दिन तय हुआ कि होटल में मिला जाए. सचिन ने पुणे गेट होटल में अपने लिए एक कमरा बुक करा लिया. सपना सचिन से मिलने पहुंची. उससे पहले कि दोनों के बीच किसी तरह का संबंध बनता सपना ने अपनी कुछ मजबूरी बताकर सचिन से 12 हजार रुपए अर्जेंट मांगा. उसने तुरंत दे दिया. वो तो संबंध बनाने के लिए बेकरार था, लेकिन लड़की कुछ और सोच कर आई थी. उसने दोबारा उससे 38 हजार रुपए मांगे.
सचिन को अब समझ में आने लगा था कि सपना उसके साथ धोखाधड़ी कर रही है. उसने पैसे देने से मना कर दिया. इसके बाद उस लड़की ने कहीं कॉल किया, जिसके बाद कुछ लोग होटल के उनके कमरे में आ गए. सचिन की जमकर धुलाई कर डाली. उसके पास मौजूद पैसे, घड़ी, सोने की चैन-अंगूठी, सब कुछ लूट कर वहां से फरार हो गए. प्यार में लुटे आशिक की तरह सचिन किसी तरह से हिम्मत बांधकर थाने पहुंचा. पुलिस के सामने अपनी आपबीती बताई. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 394, 506 और 34 के तहत 90 हजार के लूट का केस दर्ज कर लिया. आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई. इधर सपना और उसके साथ मुंबई में एक शिकार की तलाश में लगे हुए थे. उसी दौरान पुणे पुलिस को उनके मंसूबों के बारे में पता चल गया. पुलिस ने वहां जाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
ये तो रही पुणे के सचिन की कहानी, जो कि लकी था कि उसके केस में आरोपी गिरफ्तार हो गए. हर साल बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं. उनमें युवा ज्यादातर शामिल हैं, जो कि सच्चे प्यार की तलाश में डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. 'टिडर', 'जुस्क', 'बम्बल', 'हैपन', 'मैच', 'वन्स', 'हिज', 'हगल', 'द लीग', 'चैपी', 'प्लेंटी ऑफ फिश' और 'लेस्ली' जैसी तमाम ऐप्स मौजूद हैं, जहां लोग डेटिंग के लिए मौजूद हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपने देश में इस समय करीब 3 करोड़ लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये संख्या साल 2024 तक 5 करोड़ हो जाएगी. इसके साथ ही डेटिंग ऐप्स की इंडस्ट्री करीब 3 हजार 700 करोड़ रुपए की है, जो अगले दो वर्षों में लगभग 6 हजार 500 करोड़ रुपए तक हो जाएगी. भारतीय युवा औसतन तीन घंटे इन डेटिंग ऐप्स पर बिताते हैं.
डेटिंग ऐप्स के शिकार लोगों की हैरान कर देने वाली कहानियां...
लंदन से एमबीए लड़की डेटिंग ऐप के जरिए लूटती थी
इसी साल 10 अक्टूबर की बात है. गुरुग्राम के रहने वाले एक शख्स ने सेक्टर 29 थाने में शिकायत दर्ज कराई कि डेटिंग ऐप बम्बल के जरिए उससे दोस्ती करने वाली एक महिला ने उसे लूट लिया है. उसने बताया कि डेटिंग ऐप के जरिए उस महिला से उसकी दोस्ती हुई थी. 1 अक्टूबर को उसने फोन करके मिलने की इच्छा जताई. गुरुग्राम के सेक्टर 47 में एक बार के पास दोनों मिले. एक ठेके से शराब खरीदी और घर पर आ गए. वहां पहुंचने पर दोनों शराब पीने लगे. इस बीच लड़की ने आईसक्यूब मंगाने के बहाने किचन में भेज दिया. उसी दौरान उसकी ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला दिया. इसके बाद पीड़ित बेहोश हो गया. तीन दिन वैसे ही पड़ा रहा. होश आने पर पता चला कि वो तो लुट चुका है. उसके सोने की चेन, आईफोन, 10 हजार कैश, क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेकर महिला फरार हो चुकी थी.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









