
'देहरादून में आवाज सुनाई दे रही है...', CM धामी ने फोन पर ली अफसर की क्लास, कहा- इनपर तत्काल एक्शन लीजिए!
AajTak
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत का समाधान नहीं होने पर अधिकारियों को फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले सामान्य शिकायत का निराकरण नहीं हुआ. ये बहुत गंभीर विषय है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को फटकार लगाई है. इस दौरान उन्होंने फोन पर शिकायतकर्ता से बात की, जिसमें पीड़ित ने बताया कि बीते तीन महीनों से अधिकारी उसे टहला रहे थे. ये सुनते ही मुख्यमंत्री आगबबूला हो गए और सीनियर अधिकारियों से कहा कि आप एक्शन लीजिए.
मुख्यमंत्री ने जब पीड़ित से फोन पर बात की उसने बताया कि मेरे घर के बिजली का बिल तीन महीनों से बहुत ज्यादा आ रहा है. जब मैंने इसकी शिकायत की तो एसडीएम साहब का कॉल आया था. जब सीएम ने उनसे पूछा कि ये कॉल कब आया था तो पीड़ित ने बताया कि जब शिकायत की, उसके एक सप्ताह बाद ही कॉल आया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि आप अपने बिजली मीटर के साथ एक चेक मीटर और लगवाइए ताकि उस आधार पर चेक कराया जाएगा कि ये बिल ज्यादा क्यों आ रहा है.
पीड़ित से बात करते हुए सीएम ने सीनियर अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मामले में कार्रवाई की जाए. सीएम धामी ने कहा, "इसको दिखवाइए. ये बहुत ही गंभीर मामला है. बीते तीन महीने से बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है, लेकिन अबतक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसको एमडी साहब आप देखिए या सेक्रेटरी साहब आप करेंगे. ये बहुत गंभीर विषय है. बीते तीन महीने से एक नॉर्मल समस्या का निराकरण नहीं हुआ. अगर नहीं होने वाला है तो तुरंत आगे फॉरवर्ड करें. कुछ लोगों ने 15 दिनों से ज्यादा तक शिकायतों को रखा हुआ है."
सीएम ने अधिकारियों को दिए निर्देश
पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, "इसका मतलब है कि मानसिकता काम करने की नहीं है. इसके लिए शिकायत रखे हुए हैं. मानसिकता ये होनी चाहिए कि अगर प्रॉब्लम आई है तो इसका तुरंत निराकरण करना है या आगे बढ़ाना है. इसके लिए 15 दिनों की भी जरूरत क्या है. मेरे पास शिकायत आई. उसको एक-दो दिन सॉल्व करके देखते हैं, नहीं कर पाए तो उसको आगे बढ़ा देते हैं."

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









