
'देशभक्त होना इतना मुश्किल है क्या...', विदेश दौरे पर गए डेलिगेशन में शामिल सलमान खुर्शीद ने पूछा सवाल
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सलमान खुर्शीद ने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि वह अपने एक्स पोस्ट में किस पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए अपने नेताओं के चयन से नाराज है और केंद्र सरकार पर अनदेखी के आरोप लगा रही है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में से एक के सदस्य और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद लगातार आलोचना झेल रहे हैं. पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद और शशि थरूर डेलिगेशन में शामिल होने के बाद से लगातार अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं और अब उन्होंने सोमवार को एक सवाल पूछते हुए कहा कि ऐसे डेलिगेशन के लिए 'देशभक्त होना' क्या इतना मुश्किल है, जो आतंकवाद के खिलाफ मिशन पर है.
'राजनीतिक निष्ठा पर सवाल'
उन्होंने एक पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'जब मैं आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश दुनिया तक पहुंचाने के मिशन पर हूं, तो यह दुखद है कि हमारे देश में लोग राजनीतिक निष्ठा को तौल रहे हैं, क्या देशभक्त होना इतना मुश्किल है?'
सलमान खुर्शीद का यह बयान जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की तारीफ करने के कुछ दिनों बाद आया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, जेडीयू के सांसद संजय कुमार झा की अगुवाई वाले एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख बताने के लिए विदेश दौरे कर रहा है. इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर का दौरा करने के बाद यह प्रतिनिधिमंडल फिलहाल मलेशिया में है.
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हालांकि सलमान खुर्शीद ने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि वह अपने एक्स पोस्ट में किसे निशाना बना रहे हैं, लेकिन उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए अपने नेताओं के चयन से नाराज है, जिसके बारे में पार्टी ने दावा किया है कि सरकार ने लिस्ट की अनदेखी की है और जिन लोगों का नाम पार्टी की तरफ से भेजा गया था, उनको डेलिगेशन में जगह नहीं मिली है.

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