
दिल्ली में हर दिन 25 लोगों ने तोड़ा दम, मौत बनकर मंडरा रही जहरीली हवा
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दिल्ली सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2024 में श्वसन रोगों से 9211 मौतें दर्ज की गईं, जो 2023 से अधिक हैं. वहीं दिल की बीमारियों से 21,262 लोगों की मौत हुई, जो सबसे बड़ा कारण बना है. कुल मौतों की संख्या और मृत्यु दर दोनों में बढ़ोतरी हुई है. अगर इसका औसत देखें तो साल 2024 में हर दिन 25 लोगों की मौत हुई है.
दिल्ली की हवा अब सिर्फ सांसों को नहीं ज़िंदगी को भी छोटा कर रही है. राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ती मौतों के आंकड़े एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आए हैं. दिल्ली सरकार द्वारा जारी ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में श्वसन रोगों से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी हुई है जबकि दिल से जुड़ी बीमारियां मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है. अगर सरकार द्वारा जारी आंकड़ों का औसत निकाले तो साल 2024 में दिल्ली में हर दिन सिर्फ श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से 25 लोगों की मौत हुई है.
दिल्ली में हर दिन बुझ रहीं 25 सांसें
आंकड़ों के अनुसार, 2024 में श्वसन (respiratory) रोगों से 9,211 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में यह संख्या 8,801 थी. यानी एक साल में सांस की बीमारियों से मरने वालों की संख्या में साफ इज़ाफा हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्थमा,निमोनिया,फेफड़ों का कैंसर और टीबी जैसी बीमारियां इसके प्रमुख कारण हैं. प्रदूषण, जहरीली हवा, धूल-धुआं और बिगड़ती जीवनशैली को इसके पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है. चिंता की बात यह भी है कि ये बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि युवाओं और बच्चों को भी प्रभावित कर रही हैं.
दिल्ली में मौतों का सबसे बड़ा कारण 2024 में परिसंचरण तंत्र (circulatory system) से जुड़ी बीमारियां रहीं. इस श्रेणी में कुल 21,262 मौतें दर्ज की गईं. इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, धमनियों में रुकावट और हार्ट फेलियर जैसे मामले शामिल हैं.
2023 में इसी श्रेणी में 15,714 मौतें हुई थीं, यानी एक साल में करीब 5,500 से अधिक मौतों की बढ़ोतरी हुई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे तनावपूर्ण जीवनशैली, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ते प्रदूषण से जोड़कर देख रहे हैं.
2024 में श्वसन रोगों से 9,211 मौतें

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