
दिल्ली: बच्चों को फर्जी गोद लेने के कागज बनवाते, फिर निःसंतान दंपतियों को लाखों में बेच देते, डॉक्टर समेत 10 गिरफ्तार
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दिल्ली पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है जो फर्जी गोद लेने के कागज़ों के जरिए शिशुओं की खरीद-फरोख्त कर रहा था. इस मामले में एक डॉक्टर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने अब तक 6 शिशुओं को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से सुरक्षित बचाया है. गिरोह बच्चों को 1.8 लाख से 7.5 लाख रुपये में बेचता था.
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया, जिसमें नवजात और छोटे शिशुओं को अवैध रूप से बेचा जा रहा था. आरोपी माता-पिता से बच्चों को लेकर फर्जी गोद लेने के दस्तावेज तैयार करते और फिर इन्हें निःसंतान दंपतियों को लाखों में बेच दिया जाता था.
डॉक्टर भी शामिल गिरोह में शामिल डॉक्टर कमलेश कुमार (33) का KK हॉस्पिटल, फतेहाबाद (आगरा) में संचालन है. वह गर्भपात न करा पाने वाली माताओं से पैसे लेकर बच्चों की डिलीवरी करता और फिर उन्हें बेच देता था. पुलिस ने मरीज बनकर डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़ा.
मुख्य आरोपी और गिरोह का नेटवर्क पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सुंदर (35) मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है और बच्चों की खरीद-फरोख्त में अहम भूमिका निभाता था. गिरोह में दो बहनें कृष्णा और प्रीति भी शामिल थीं, जो बीएएमएस (BAMS) की पढ़ाई से जुड़ी हुई हैं और अपनी दाई मां के साथ बच्चों की डिलीवरी करवाती थीं.
बच्चे कैसे बेचे जाते थे? गिरोह बच्चों को 1.8 लाख से 7.5 लाख रुपये तक में बेचता था. आरोपियों में से एक सुंदर ने बताया कि उसने अपहरण किए गए बच्चे को पहले आगरा के एक दंपति को बेचा और फिर उन्हें आगे किसी और को बेचने की योजना थी.
पुलिस ने कैसे पकड़ा? मामला तब खुला जब यूपी के बांदा निवासी सुरेश ने दिल्ली के सराय काले खां ISBT से अपने छह महीने के बच्चे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई. सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल नंबर ट्रैकिंग से पुलिस आरोपियों तक पहुंची. फिर यूपी, उत्तराखंड और आगरा में छापेमारी कर छह बच्चों को बचाया गया.
अब तक 10 गिरफ्तार अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और छह शिशुओं को सुरक्षित निकाला गया है. एक बच्चा अपने माता-पिता को लौटा दिया गया है जबकि बाकी को बाल संरक्षण गृह भेजा गया है. पुलिस ने कहा है कि गिरोह दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हैदराबाद और चेन्नई तक फैला हुआ था.

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