
दिल्ली: पानी के लिए बेमानी हो रहे कोरोना प्रोटोकॉल, प्यास बुझाएं या बीमारी से खुद को बचाएं
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दिल्ली के लिए पानी की किल्लत और कोरोना संक्रमण अब दोहरी चुनौती के रूप में सामने हैं. दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी के करीब स्थित संजय कैम्प में जल संकट गहरा गया है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आज भी पानी के संकट से जूझ रही है. पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी आज भी लोगों को 8-8 घंटे तक सड़क पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है. ये हकीकत है दिल्ली के कई इलाकों की, जो सरकार के हर घर तक नल से जल के दावे की पोल खोलती है. अब बरसात शुरू होने को है लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में पानी का संकट बना हुआ है. दिल्ली के लिए पानी की किल्लत और कोरोना संक्रमण अब दोहरी चुनौती के रूप में सामने हैं. दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी के करीब स्थित संजय कैम्प में जल संकट गहरा गया है. लोग तपती धूप में सड़क पर खड़े होकर दिल्ली जल बोर्ड के टैंकर इंतजार करते हैं. लोग बताते हैं कि कभी एक टैंकर आता है तो कई दफे ऐसा होता है कि कोई टैंकर नहीं पहुंचता.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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