
दिल्ली-पंजाब से कश्मीर तक पानी-पानी... देश में 24 नदियां-50 डैम बाढ़ के सेंसिटिव जोन में
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देश के कई राज्यों में भारी बारिश और नदियों में उफान की वजह से बाढ़ की स्थिति बिगड़ रही है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का पानी डरा रहा है तो वहीं, पंजाब में बाढ़ से हाहाकार मचा है. सतलुज, ब्यास और रावी समेत 24 नदियों के रौद्र रूप से गंभीर बाढ़ की स्थिति है.
देशभर में बाढ़-बारिश ने तबाही मचाई है. अधिकांश नदियां विकराल रूप में तबाही मचा रही हैं. हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से छोड़े गए पानी के कारण पंजाब की प्रमुख नदियां सतलुज, ब्यास और रावी उफान पर हैं. जिससे बाढ़ की गंभीर स्थिति है.
देश के कई राज्यों में बाढ़ का गंभीर संकट केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 24 नदियों में गंभीर बाढ़ की स्थिति है, जबकि 33 अन्य नदियों का जलस्तर सामान्य से ऊपर है. जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की नदी में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. देश के कई राज्यों में भारी बारिश और नदियों के उफान के चलते हालात बिगड़ते जा रहे हैं.
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से छोड़े गए पानी के कारण पंजाब की प्रमुख नदियां सतलुज, ब्यास और रावी उफान पर हैं. पंजाब में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है, इस बीच उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इससे ब्यास, सतलुज, रावी, चिनाब, अलकनंदा और भागीरथी नदियों में जलस्तर ओर बढ़ सकता है.
पंजाब के 23 जिलों में बाढ़, 3.55 लाख लोग प्रभावित पंजाब के सभी 23 जिलों में बाढ़ से 1,655 गांवों में 3.55 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. राज्य में सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की छुट्टियां 3 सितंबर से बढ़ाकर 7 सितंबर कर दी गई हैं. 1 अगस्त से 3 सितंबर तक बाढ़ में 37 लोगों की मौत हुई है. गांव के गांव डूब गए हैं. घर-मकान टापू बन गए हैं. खेतों में पानी भरने से फसलें तबाह हो गई हैं. मुसीबत की मार के बीच लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए सेना-NDRF मोर्चे पर डटी हुई है.
पंजाब में सतलुज, ब्यास और रावी, यह तीनों नदियां उफान पर हैं. जिससे पंजाब पर 37 साल बाद बाढ़ की ऐसी आफत आई हुई है. वैसे तो पंजाब के सभी 23 जिले प्रभावित हैं लेकिन गुरदासपुर, पठानकोट, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. बहुत से लोग अब भी घरों की छतों या ऊंचे जगहों पर फंसे हैं.लोगों का लगातार रेस्क्यू किया जा रहा है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.
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