
दिल्ली: कोरोना मिसमैनेजमेंट पर केजरीवाल को घेरेगी BJP, अमित शाह के घर बनी रणनीति
AajTak
अमित शाह के यहां हुई इस बैठक में रणनीति बनी कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी, ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतें, अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी, हॉस्पिटल में आईसीयू बेड की कमी, अस्पतालों के बाहर दम तोड़ते मरीज, वैक्सीन की कमी, धूल और गंदगी फांकते मोहल्ला क्लिनिक समेत तमाम गलतियों और नाकामियों को लेकर बीजेपी हफ्ते में तीन दिन प्रेस कांफ्रेस करेगी.
दिल्ली बीजेपी, प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते ममाले को लेकर मुख्यमंत्री केजरीवाल को घेरने की तैयारी में है. शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के साथ बैठक हुई. बैठक में केजरीवाल सरकार की कोरोना से निपटने में असफलता और इससे होने वाली मौतों को रोकने में नाकाम रहने पर घेरने की रणनीति बनाई गई है. अमित शाह के यहां हुई इस बैठक में दिल्ली से बीजेपी के सातों सांसद, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर बिधूड़ी, दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता और दिल्ली बीजेपी के प्रभारी बैजयंत पांडा मौजूद थे.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









