
दिल्ली के पॉश इलाके में ₹200 करोड़ की प्रॉपर्टी में फर्जीवाड़ा! कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज की FIR
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दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में 200 करोड़ की प्रॉपर्टी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. कारोबारी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया. यह मामला बेहद हैरान करने वाला है. पढ़ें पूरी कहानी.
Delhi Property Scam: दिल्ली के पॉश इलाके साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 में स्थित एक बेहद कीमती प्रॉपर्टी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों में FIR दर्ज की है. पुलिस के मुताबिक, यह प्रॉपर्टी करीब 150 से 200 करोड़ रुपये की बताई जा रही है. शिकायत एक जाने-माने कारोबारी ने दर्ज कराई है, जिसमें करोड़ों की संपत्ति को अवैध तरीके से बेचने का आरोप लगाया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
कारोबारी ने दर्ज कराई शिकायत इस मामले में शिकायतकर्ता की पहचान ध्रुव जालान के रूप में हुई है, जो पेशे से कारोबारी हैं और गुरुग्राम के निवासी हैं. FIR के अनुसार, यह शिकायत 22 जनवरी को दर्ज की गई थी. ध्रुव जालान का दावा है कि जिस प्रॉपर्टी को लेकर विवाद हुआ है, वह लंबे समय से उनके परिवार के स्वामित्व में रही है. उन्होंने पुलिस को बताया कि यह जमीन उन्हें कानूनी तरीके से विरासत में मिली थी. इसके बावजूद कथित आरोपियों ने धोखाधड़ी कर संपत्ति को बेचने की कोशिश की.
1958 में दादा को मिली थी प्रॉपर्टी शिकायत के अनुसार, साउथ एक्सटेंशन पार्ट-1 में स्थित करीब 2,292 स्क्वायर यार्ड का यह प्लॉट वर्ष 1958 में ध्रुव जालान के दादा अमर चंद जालान को आवंटित किया गया था. तब से यह संपत्ति जालान परिवार के पास रही. शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्षों से इस जमीन पर परिवार का निर्विवाद अधिकार रहा है. किसी भी स्तर पर स्वामित्व को लेकर पहले कोई विवाद नहीं था. यही वजह है कि मौजूदा फर्जीवाड़े ने परिवार को चौंका दिया.
ऐसे मिला मालिकाना हक ध्रुव जालान के मुताबिक, वर्ष 1997 में उनके पक्ष में एक वैध वसीयत बनाई गई थी. इसके बाद 2008 में परिवार के अन्य कानूनी वारिसों ने रिलिंक्विशमेंट डीड पर हस्ताक्षर कर दिए थे. इसके चलते वह इस प्रॉपर्टी के एकमात्र और पूर्ण मालिक बन गए. शिकायत में यह भी कहा गया है कि 2008 के बाद से वह लगातार इस संपत्ति के कब्जे में हैं. किसी तरह का विवाद या दावा बीच में नहीं आया था.
₹41 करोड़ में दिखाई गई फर्जी बिक्री शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 30 जनवरी 2025 की तारीख में एक फर्जी सेल डीड तैयार की गई. इस दस्तावेज़ के जरिए पूरी प्रॉपर्टी को सिर्फ 41 करोड़ रुपये में बेचने का दिखाया गया. ध्रुव जालान का कहना है कि यह रकम प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत के मुकाबले बेहद कम है. उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया फर्जीवाड़ा बताया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह सौदा पूरी तरह संदेह के घेरे में है.
जाली दस्तावेजों से रची साजिश शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह सेल डीड जाली दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई. इनमें 7 दिसंबर 2018 की एक कथित एग्रीमेंट टू सेल और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी शामिल है. दावा किया गया कि ये दस्तावेज़ उनके पिता और परिवार की एक कंपनी द्वारा बनाए गए थे. ध्रुव जालान का कहना है कि न तो उनके पिता और न ही कंपनी ने कभी ऐसे किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए. उनके मुताबिक, यह सब एक आपराधिक साजिश का हिस्सा है.

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