
'... तो हम आपके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगे', दिल्ली सीएम आतिशी का बीजेपी नेता को अनोखा ऑफर
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आतिशी, आंदोलनरत बस मार्शलों को नियमित करने पर बहस का जवाब दे रहीं थीं, इसी दौरान उन्होंने विजेंद्र गुप्ता को ऑफर दिया कि अगर विजेंद्र बस मार्शलों को नियमित करने के प्रस्ताव को एलजी की मंजूरी दिलवा देंगे, तो आतिशी उनके खिलाफ अगले चुनावों में अपनी पार्टी का उम्मीदवार नहीं उतारने का प्रस्ताव रखेंगी.
दिल्ली में जल्द ही विधानसभा चुनाव होना है. इससे पहले इन दिनों दिल्ली विधानसभा का सत्र चल रहा है, चुनाव से पहले आखिरी सत्र है, तो राजनीतिक बयानबाजी भी जमकर हो रही है, इसी बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता को एक अनूठा ऑफर दे दिया. दरअसल, दिल्ली विधानसभा में बहस बस मार्शलों को पक्का करने की चल रही थी, जिस मुद्दे को लेकर पिछले कई महीनों से बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है.
आतिशी, आंदोलनरत बस मार्शलों को नियमित करने पर बहस का जवाब दे रहीं थीं, इसी दौरान उन्होंने विजेंद्र गुप्ता को ऑफर दिया कि अगर विजेंद्र बस मार्शलों को नियमित करने के प्रस्ताव को एलजी की मंजूरी दिलवा देंगे, तो आतिशी उनके खिलाफ अगले चुनावों में अपनी पार्टी का उम्मीदवार नहीं उतारने का प्रस्ताव रखेंगी. विजेंद्र गुप्ता लगातार 2 बार से दिल्ली की रोहिणी से विधायक हैं, आतिशी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ये भी कह दिया कि उम्मीदवार उतारना तो छोड़िए, वो विजेंद्र गुप्ता के पक्ष में रोहिणी आकर चुनाव प्रचार तक करेंगी.
क्या है बस मार्शलों की मांग?
दिल्ली के 10 हज़ार से ज़्यादा बस मार्शल एक साल से ज्यादा लंबे समय से रोजगार बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इनकी मांग है कि इन्हें नियमित किया जाए ना कि कुछ महीनों का रोजगार देकर राजनीतिक दल इन्हें चुनावी हथियार बनाएं. इससे पहले बस मार्शल दिल्ली की मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल समेत तमाम आला अधिकारियों और नेताओं का दरवाजा खटखटा चुकें हैं, लेकिन उनकी बात नहीं बन पा रही.
लगातार आंदोलन कर रहे बस मार्शल
इन बस मार्शलों को लेकर दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की बैठक में ये प्रस्ताव पारित किया गया था कि जब तक दिल्ली में प्रदूषण है, यानि फरवरी महीने तक उन्हें चार महीने की अस्थाई नौकरी दे दी जाए, लेकिन बस मार्शलों का कहना है कि फरवरी में चुनाव खत्म होते ही उन्हें नियमित करने की मांग सरकार ठंडे बस्ते में डाल देगी, इसलिए वो लगातार सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं.

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