
तेलंगाना ने रोकी आंध्र प्रदेश से आ रही सभी एंबुलेंस, नए नियम से मरीज परेशान
AajTak
राज्य के अस्पतालों में बाहर से आ रहे कोरोना के मरीजों को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने हर बॉर्डर पर एक चेकपोस्ट बना दिया है. इस चेकपोस्ट से उन ही एंबुलेंस को आने की इजाजत है, जिन्होंने सरकार से परमिशन ली है.
कोरोना संकट के बीच तेलंगाना सरकार का एक फैसला आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है. दरअसल, राज्य के अस्पतालों में बाहर से आ रहे कोरोना के मरीजों को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने हर बॉर्डर पर एक चेकपोस्ट बना दिया है. इस चेकपोस्ट से उन ही एंबुलेंस को आने की इजाजत है, जिन्होंने सरकार से परमिशन ली है. ईद के दिन ही तेलंगाना बॉर्डर पर एक एंबुलेंस को रोक दिया गया. इस एंबुलेंस में अब्दुल्ला बेहोश पड़ा था. उसकी पत्नी मेहरुन्निशा बार-बार तेलंगाना पुलिसकर्मियों के हाथ-पैर जोड़ती रही, ताकि उसे हैदराबाद जाने दिया जाए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसकी एक ना सुनी. इसके बाद वह मजबूरन करनूल गई, जहां वह एक अदद बेड की तलाश कर रही है.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









