
तमिलनाडु से दिल्ली तक थी कभी धाक... मारन बंधुओं में कंपनी पर कब्जे और फर्जीवाड़े के आरोपों पर फाइट की पूरी कहानी
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दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से लेकर चेन्नई तक मारन बंधुओं कलानिधि मारन और दयानिधि मारन की एक समय तूती बोलती थी. लेकिन आज मामला उलटा है. दोनों भाइयों के बीच कंपनी पर कंट्रोल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और फर्जीवाड़े के आरोपों ने पूरे कारोबारी जगत को चौंका दिया है. मारन परिवार DMK के संस्थापक एम करुणानिधि का करीबी और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार रहा है.
तमिलनाडु के मारन बंधु फिर चर्चा में हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने अपने बड़े भाई कलानिधि मारन को कानूनी नोटिस भेजा है और उन पर सभी नियमों को दरकिनार कर चेन्नई स्थित सन टीवी ग्रुप के हजारों करोड़ रुपए के शेयर अपने नाम ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है. मारन बंधु की कभी तमिलनाडु से दिल्ली तक धाक रही है. उसके बाद परिवार में कंपनी पर कब्जे को लेकर विवाद हुआ और फर्जीवाड़े के आरोपों पर दोनों भाइयों के बीच रार बढ़ गई. आइए जानते हैं कि इस फाइट की पूरी कहानी...
दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति और दक्षिण भारत के मीडिया बिजनेस में मारन परिवार का दबदबा किसी से छुपा नहीं रहा. इस वर्चस्व की नींव रखी थी स्व. मुरासोली मारन ने, जो डीएमके के संस्थापक एम. करुणानिधि के सबसे विश्वस्त भतीजे और पार्टी के सबसे तेजतर्रार रणनीतिकार माने जाते थे. वे तीन दशकों तक दिल्ली में डीएमके की आवाज बने रहे और राष्ट्रीय गठबंधनों के शिल्पकार माने गए. यानी मुरासोली 36 साल तक संसद के सदस्य रहे और उन्हें तीन अलग-अलग केंद्र सरकारों में केंद्रीय मंत्री बनाया गया.
2000 के दशक की शुरुआत में दोनों भाइयों ने DMK और व्यापार की समानांतर ताकत बनानी शुरू की. लेकिन अब वही ताकत एक-दूसरे के खिलाफ हथियार बन गई है. 2003 में पिता के निधन के बाद बेटों ने अपनी-अपनी राह पकड़ी. कलानिधि मारन ने एक विशाल मीडिया साम्राज्य खड़ा किया, जबकि दयानिधि मारन ने राजनीति में कदम रखा और केंद्र सरकार में मंत्री बने. दूरसंचार सुधारों को आगे बढ़ाया. बाद में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे.
कलानिधि के सन ग्रुप ने टीवी, अखबार, रेडियो, सिनेमा, एविएशन और क्रिकेट तक में अपनी पैठ बनाई तो दयानिधि ने डीएमके के राजनीतिक कद को दिल्ली में स्थापित करने की कोशिश की.
करुणानिधि के जीवनकाल में मारन परिवार के भीतर उठते विवादों को अक्सर 'घरेलू मामला' मानकर पार्टी के भीतर ही सुलझा लिया जाता था, लेकिन 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद यह स्थिति बदलती देखी जा रही है. अब पारिवारिक मतभेद सार्वजनिक हो रहे हैं और वो भी कंपनी में हिस्सेदारी, कब्जे और फर्जीवाड़े के आरोपों के साथ सामने आ रहे हैं.
मारन परिवार की यह बदलती तस्वीर सिर्फ एक पारिवारिक टकराव नहीं, बल्कि तमिल राजनीति और मीडिया शक्ति संतुलन के बदलते स्वरूप की ओर भी इशारा करती है.

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