
तख्तापलट के बाद स्थिरता दूर, सबसे ज्यादा राजनीतिक संकट झेल चुका बोलिविया आज इस मोड़ पर
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भारत के लगभग सारे पड़ोसी इन दिनों राजनीतिक उठापटक से गुजर रहे हैं. म्यांमार, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बाद नेपाल में भी ताजा-ताजा तख्तापलट हो चुका. एशिया को छोड़ दें, तो अडोल दिखता दक्षिण अमेरिका भी खास अलग नहीं. वहां एक देश ऐसा है, जहां इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि सैकड़ों बार तख्तापलट के प्रयास हुए. कभी इसमें सैनिक इनवॉल्व थे, कभी आम लोग.
नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच पीएम केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ गया. बात यहीं खत्म नहीं हुई. प्रोटेस्टर्स ने सरकारी संपत्ति को भी खासा नुकसान पहुंचाया. लगभग यही पैटर्न पूरे एशिया में दिखता रहा. भारत के कई पड़ोसी देश तख्तापलट से गुजर चुके. इस बीच एक और मुल्क की चर्चा हो रही है. बोलिविया. लैंड-लॉक्ड इस देश में सबसे ज्यादा बार सत्ता पलटने की कोशिश की गई.
सत्ता परिवर्तन तो हर जगह होता रहता है लेकिन तख्तापलट कुछ अलग है. जब किसी देश में अचानक और गैरकानूनी तरीके से सत्ता बदल जाए तो वो यही है. यह अक्सर काफी तेजी से होता है ताकि सरकार या सरकार के साथियों को संभलने का मौका न मिले. सैन्य तख्तापलट सबसे कॉमन है, जहां सरकार को गिरा सेना सत्ता में आ जाती है.
वैसे ये सिर्फ सेना तक सीमित नहीं. आम जनता भी कई बार सत्ता बदलने के लिए सड़कों पर आ जाती है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो जाता है और लोगों को दबाव सरकार को हिला देता है. आजकल सोशल मीडिया इसे खाद-पानी दे रहा है. ज्यादातर चीजें यहीं तय हो जाती हैं और सब कुछ काफी ऑर्गेनाइज्ड तरीके से होता है.
बोलिविया इसका एक उदाहरण है. 19वीं सदी की शुरुआत में स्पेनिश साम्राज्य से आजाद हुए बोलिविया के पास जीने और आगे बढ़ने के लिए सब कुछ था. कुदरती रिसोर्स भी और मैन पावर भी. लेकिन वो अटककर रह गया.
वजह? बार-बार सत्ता पलट या फिर इसकी कोशिश. दरअसल दक्षिण अमेरिका के इस पहाड़ी देश की कहानी फिल्म के उस नायक की तरह है, जो एक विलेन को हराकर आता है तो 10 और इंतजार में खड़े मिलते हैं. आजादी के बाद से यहां 200 से ज्यादा बार विद्रोह हो चुके. कहीं सेना ने सत्ता छीन ली, कहीं जनता ने विरोध कर सरकार गिराई, तो कई बार दलों में ही छीनाझपटी मच गई और सरकार ढह गई. सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ? और क्या आज भी वही चक्र जारी है?
औपनिवेशिक दौर में यहां कुदरती भंडार भरपूर था. सोना-चांदी से लेकर कई खनिज मिलते. उनकी लूट के बाद स्पेन तो लौट गया. अब बच गया एक देश, जिसके पास न घर चलाने का तजुर्बा था, न पका-पकाया खाना कि पेट भरने के बाद कुछ आराम ही कर सके. यहीं से शुरू हुआ असंतोष. दल सत्ता के लिए आपस में लड़ते-भिड़ते रहे. कई दशक बीत गए, तब सेना ने शासन अपने हाथों में ले लिया. कुछ वक्त बाद इसकी लीडरशिप भी अनुशासित नहीं रही.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

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