
डॉक्टर बनने के लिए यूक्रेन क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, कितना आता है खर्च? जानें सबकुछ
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भारत से हर साल हजारों छात्र आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लेकर यूक्रेन जाते हैं. यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के तुलना में काफी सस्ती है.
यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है. यूक्रेन के नागरिक तो देश छोड़ ही रहे हैं, अन्य देशों के जो नागरिक यूक्रेन में फंसे हैं वे भी जल्द से जल्द युद्धग्रस्त देश से निकल जाना चाहते हैं. इनमें बड़ी तादाद भारतीयों की भी है. भारत के लगभग 20 हजार छात्र यूक्रेन में रहते और पढ़ते हैं. यूक्रेन से भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना अपने आप में बड़ी चुनौती बन गया है. यूक्रेन से यूरोप की सीमा में प्रवेश करने वाले भारतीयों को अब ऑपरेशन गंगा के तहत स्वदेश वापस भेजा जा रहा है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









