
डॉक्टर उमर के ‘तालिबान-स्टाइल’ क्लासरूम की कहानी... स्टिंग में अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर बड़ा खुलासा
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आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का दौरा किया. यहां छात्रों और कर्मचारियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए. छात्रों और कर्मचारियों की पहचान की सुरक्षा के लिए उनके नाम गुप्त रखे गए हैं और उनके चेहरे ब्लर किए गए हैं.
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी लगातार सुर्खियों में है. यही वह यूनिवर्सिटी है, जहां रेड फोर्ट धमाके से जुड़े दो आरोपी डॉ. मोहम्मद उमर और डॉ. मुजम्मिल कभी पढ़ाते थे. आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जब विश्वविद्यालय का दौरा किया तो छात्रों और कर्मचारियों ने ऐसे खुलासे किए जिन्होंने सबको चौंका दिया.
छात्रों और स्टाफ से बातचीत के दौरान पता चला कि डॉ. उमर मोहम्मद, जो 10 नवंबर को लाल किले के पास i20 कार ब्लास्ट में आत्मघाती हमलावर था, अपने क्लासरूम में बेहद सख्त नियम लागू करता था. छात्रों के मुताबिक, वह पढ़ाई के दौरान 'तालिबान मॉडल' अपनाता था, जिसमें लड़के-लड़कियों को एक साथ बैठने की इजाजत नहीं थी।
सुरक्षा के मद्देनजर छात्रों और कर्मचारियों की पहचान और उनके नाम गुप्त रखे गए हैं.
लड़के-लड़कियों को साथ नहीं बैठने देता था उमर
आजतक के खुफिया कैमरे पर एक एमबीबीएस छात्र ने बताया, “हमने मुजम्मिल को कभी नहीं देखा. उमर हमारे बैच के टीचर थे. हमारे बैच में लड़के–लड़कियां साथ बैठते थे और हमें ऐसा अच्छा लगता था, लेकिन वह (उमर) आकर हमें अलग बैठा देते थे."
छात्र ने यह भी कहा, “हमने यहां कभी i20 कार नहीं देखी.”

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