
डिजिटल प्रचार: BJP, कांग्रेस, सपा से बसपा तक... किसकी कितनी तैयारी, कौन पड़ेगा भारी?
AajTak
कोरोना वायरस की पिछली दो लहरों के कारण देश-दुनिया में तकनीक के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं. लॉकडाउन के कारण 'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर ने कंपनियों को डिजिटली मजूबत होने को मजबूर किया. अब तीसरी लहर देश में राजनीतिक पार्टियों की परीक्षा ले रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में 15 जनवरी तक अचानक वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर प्रचार के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का बिगुल बीते शनिवार को ही बज गया, जब चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान किया. 10 फरवरी से सात चरणों में से पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए आयोग ने 15 जनवरी तक रैलियों पर रोक लगा दी है और सिर्फ वर्चुअल प्रचार की अनुमति दी है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि पार्टियां डिजिटल प्रचार के लिए कितनी तैयार हैं और इस मामले में कौन आगे दिख रहा है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









