
ज्यादा वोट अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी की गारंटी नहीं! समझें- 270 इलेक्टोरल वोट्स का पूरा गणित
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अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया थोड़ी जटिल है. इसे ऐसे समझें कि आज हो रहे चुनावों में जो उम्मीदवार जीतेगा, जरूरी नहीं कि वो देश का राष्ट्रपति बन जाए. दरअसल राष्ट्रपति पद जीतने के लिए, एक उम्मीदवार को इलेक्टोरल कॉलेज में बहुमत हासिल करना होता है.
US में राष्ट्रपति चुनाव जारी है. डेमोक्रेट पार्टी से राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस मैदान में हैं तो वहीं उनके विरोध में रिपब्लिकन पार्टी से डोनाल्ड ट्रंप चुनाव लड़ रहे हैं. 5 नवंबर से शुरू हो रहे मतदान के बाद नतीजों में कुछ दिन का समय लग सकता है. US में चुनाव पहले हो जाता है जबकि विजेता उम्मीदवार चार्ज जनवरी 2025 से ही संभालेगा. नया राष्ट्रपति जनवरी 2025 में पद की शपथ लेगा.
अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया थोड़ी जटिल है. इसे ऐसे समझें कि आज हो रहे चुनावों में जो उम्मीदवार जीतेगा, जरूरी नहीं कि वो देश का राष्ट्रपति बन जाए. दरअसल राष्ट्रपति पद जीतने के लिए, एक उम्मीदवार को इलेक्टोरल कॉलेज में बहुमत हासिल करना होता है.
आइए अब इलेक्टोरल कॉलेज के बारे में जान लेते हैं...
यह अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का सबसे जटिल चरण है. इलेक्टोरल कॉलेज दरअसल वह निकाय है, जो राष्ट्रपति को चुनता है. इसे आसान भाषा में कुछ यूं समझिए कि आम जनता राष्ट्रपति चुनाव में ऐसे लोगों को वोट देती है जो इलेक्टोरल कॉलेज बनाते हैं और उनका काम देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को चुनना है. नवंबर के पहले सप्ताह में मंगलवार को वोटिंग उन मतदाताओं के लिए होती है जो राष्ट्रपति को चुनते हैं. ये लोग इलेक्टर्स कहलाते हैं. ये इलेक्टर्स निर्वाचित होने के बाद 17 दिसंबर को अपने-अपने राज्य में एक जगह इकट्ठा होते हैं और राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए वोट करते हैं.
यानी जो अमेरिकी जनता आज वोट कर रही है वो सीधे तौर पर स्वयं राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का चुनाव नहीं कर रही. ठीक ऐसा ही नियम उपराष्ट्रपति पद के लिए भी है.
कैसे काम करता है इलेक्टोरल कॉलेज?

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