
जिसे चार दिन नहीं टिकना था, वो तीन साल लड़ा, क्या पाकिस्तान को भी मिल सकता है यूक्रेन जैसा ग्लोबल सपोर्ट?
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फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तब अनुमान था कि यूक्रेन एकाध हफ्ते से ज्यादा नहीं टिक सकेगा. कहा गया कि मॉस्को की ताकत कीव को चुटकियों में मिटा देगी. साढ़े तीन साल हो चुके. जंग अब भी जारी है. अब भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी इस्लामाबाद को लेकर यही अंदाजे लगाए जा रहे हैं. हालांकि उसके यूक्रेन की तरह लंबा टिकने की संभावना लगभग नहीं है.
पहलगाम आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया. इससे बौखलाया पाकिस्तान सारे कायदे तोड़ने लगा. अब दोनों देशों में लगभग युद्ध की स्थिति बनी हुई है. सैन्य से लेकर आर्थिक मामले में भी ये देश हमारे आसपास नहीं. लेकिन फिर भी वो आंखें दिखा रहा है. इस बीच यूक्रेन से भी उसकी तुलना होने लगी जो तीन साल बाद भी रूस से जंग में मुब्तिला है.
जब रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया, तब दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का मानना था कि यूक्रेन कुछ दिन भी नहीं टिक पाएगा. लेकिन वो न केवल टिका, बल्कि कई मोर्चों पर रूस को कमजोर करने की भी कोशिश की. जैसे, मॉस्को पर कई सारी पाबंदियां लग गईं, वो भी ग्लोबल स्तर पर. हालांकि यूक्रेन के इतना लंबा चलने के पीछे अलग ताकतें और वजहें रहीं.
इस छोटे देश को लगभग पूरे पश्चिम का सपोर्ट मिला. अमेरिका में तब जो बाइडेन की सरकार थी, जिसने यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता लगातार दी. यही हाल जर्मनी समेत पूरे यूरोपियन यूनियन का था. नाटो ने उसे मॉडर्न हथियार और सैटेलाइट इंटेलिजेंस दिया. सारे ही वेस्ट ने उसे डिप्लोमेटिक राहतें दीं ताकि वो आराम से जंग पर फोकस कर सके.
नैरेटिव वॉर भी जमकर चला. यूक्रेन ने लगातार ऐसी खबरें, तस्वीरें और वीडियो पेश कीं, जिससे रूस कटघरे में आ गया. यहां तक कि उसपर युद्ध के नियम तोड़ने और ह्यूमन राइट्स उल्लंघन के आरोप लग गए. सारी दुनिया की संवेदनाएं यूक्रेन के हिस्से आ गईं, जो छोटा देश होकर भी रूस जैसे सेकंड सुपर पावर से जूझ रहा था. मददें और बढ़ीं. जर्मन रिसर्च संस्थान कील इंस्टीट्यूट फॉर वर्ल्ड इकनॉमी (IfW) इसपर नजर रख रही है कि कौन सा देश यूक्रेन को कितनी सहायता दे रहा है. इसके मुताबिक करीब 30 देशों ने उसे हथियारों की मदद दी. इसमें सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का रहा.
यूक्रेन के इस उदाहरण को देखकर यह सवाल उठ सकता है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच फुल स्केल युद्ध शुरू हो जाए तो क्या पाकिस्तान के पैर भी जमे रहेंगे. पहली नजर में ये तुलना भले ही सही लगे लेकिन हकीकत में यूक्रेन और पाकिस्तान के हालात काफी अलग हैं.

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