
जिसने इजरायल को डराया, वही अब मारा गया... ईरान के मिसाइल आर्किटेक्ट हाजीजादेह की हत्या के क्या मायने?
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इजरायल और ईरान जंग के मैदान में कूद गए हैं. इजरायल ने शुक्रवार तड़के ऑपरेशन राइजिंग लॉयन छेड़ दिया है और ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ईरान के एक अंडरग्राउंड कमांड सेंटर को भी निशाना गया, जिसमें वायुसेना कमांडर हाजीजादेह मारा गया है. माना जा रहा है कि यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि रणनीति के तहत किया गया था.
मिडिल ईस्ट में जिसका डर था, वही हो गया है. इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज हो गई है. इजरायली सेना ने शुक्रवार तड़के 'ऑपरेशन राइजिंग लॉयन' के जरिए ईरान पर कहर बरपाया. हमले में ईरान के बैलस्टिक मिसाइल प्रोग्राम चीफ आमिर अली हाजीजादेह समेत टॉप कमांडर और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए. इस युद्ध के बीच हाजीजादेह की मौत ईरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
हजीजादेह वही है, जिसने साल 2024 में ईरान की ओर से इजरायल पर किए गए अब तक के सबसे बड़े बैलिस्टिक मिसाइल हमले की रणनीति तैयार की थी. यह हमला हिज्बुल्ला नेता हसन नसरल्लाह और अन्य सहयोगी कमांडरों की हत्या के जवाब में किया गया था. इस ऑपरेशन में ईरान ने दर्जनों मिसाइलें दागीं थी, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया था और बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी. उस हमले के पीछे हाजीजादेह की की कुशल रणनीति को माना गया था, जिसने उसे तेहरान की सैन्य नीति का चेहरा बना दिया था.
अब इजरायल ने मचाई ईरान में तबाही
इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ परमाणु ठिकानों पर भी बमबारी की है. ईरान की सबसे अहम नातांज समेत तीन न्यूक्लियर साइट को तबाह कर दिया. इजरायल के 200 फाइटर जेट्स ने ईरान में घुसकर तबाही मचाई है अैर करीब 100 ठिकानों पर बमबारी की. अब ईरान ने बदले का ऐलान किया है और इजरायल पर 100 ड्रोन हमलों से पलटवार किया है और नुकसान पहुंचाया.
मारा गया हाजीजादेह
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एयर फोर्स प्रमुख अमीर अली हाजीजादेह की मौत ने इस टकराव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है. हाजीजादेह मिसाइल कार्यक्रम को लीड कर रहा था. उसके पास ईरान के हवाई क्षेत्र की रक्षा करने और विदेशों में हमले करने से जुड़ी रणनीति पर काम करने की जिम्मेदारी थी.

ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को लेकर मचे घमासान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कल मीडिया के सामने आकर युद्ध को लेकर कई बड़ी बातें कहीं नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका को घसीटने की फर्जी खबरों का खंडन किया. कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा वही निर्णय लेते हैं जो उन्हें अमेरिका के हित में लगता है. उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका के तालमेल की भी प्रशंसा की.

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?











