
जिम जाने वालों के लिए कितना जरूरी है प्रोटीन पाउडर? सेलेब्रिटी ट्रेनर ने बताई हकीकत
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आमिर खान, अर्जुन कपूर और रणबीर कपूर जैसे कई सेलेब्स को ट्रेनिंग देने वाले कोच दीपेश भट्ट ने प्रोटीन पाउडर के बारे में बताया है कि प्रोटीन सप्लीमेंट लेना सही है या नहीं, इस बारे में आर्टिकल में बताएंगे.
Protein powder supplement: फिटनेस इंडस्ट्री में प्रोटीन पाउडर के बारे में अक्सर आपने मिली-जुली बातें सुनी होंगी. कोई कहता है इन्हें लेना सही है तो कोई कहता है, इनसे किडनी पर बुरा असर होता है. दरअसल, प्रोटीन पाउडर एक ऐसा सप्लीमेंट है जो शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने में मदद करता है. यह दूध से मिलने वाले व्हे, दूध के ठोस हिस्से केसिन, सोया, मटर या दालों से बनाया जाता है. विभिन्न सोर्सों से प्रोटीन निकालकर, सुखाकर और पीसकर पाउडर बनाया जाता है. इसे पानी या दूध में मिलाकर पिया जाता है. ऐसे में आमिर खान, अर्जुन कपूर और रणबीर कपूर जैसे कई सेलेब्स को ट्रेनिंग देने वाले कोच ने साइंटिफिक तरीके से समझाया है कि प्रोटीन सप्लीमेंट लेना सही है या नहीं.
सेलेब्रिटी कोच दीपेश भट्ट ने अपनी बुक में बताया है, 'दुनिया में कई ऐसे इंटरनेशनल एथलीट हैं जो शाकाहारी वेगन हैं और अपनी डाइट (सॉलिड मील) से ही प्रोटीन लेते हैं और फिर भी वर्ल्ड क्लास परफॉर्म करते हैं. वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वर्कआउट से पहले, वर्कआउट के दौरान और वर्कआउट के बाद प्रोटीन सप्लीमेंट लेते हैं लेकिन उतनी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे पाते. हममें से अधिकतर लोग इन दोनों के बीच में आते हैं और कुछ इतने सीरियस हो जाते हैं कि प्रोटीन पाउडर खरीद लेते हैं. मेरा मानना है कि सप्लीमेंट महंगे होते हैं इसलिए वो फिटनेस पर बोझ नहीं बनने चाहिए. फिटनेस किफायती होनी चाहिए, न कि जेब पर बोझ.'
कोच दीपेश ने बुक में बताया है, 'प्रोटीन की जरूरत मसल्स ग्रोथ और ट्रेनिंग के दौरान होने वाले टिश्यूज को रिपेयर करने के लिए होती है लेकिन अगर कोई व्यक्ति अच्छी डाइट लेता है और हफ्ते में सिर्फ 2 से 3 दिन जिम जाता है तो उसे अंडे, पनीर, सोया, दही, मीट और नट्स जैसी चीजों से ही पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता है. न्यूट्रिशन और हेल्थ रिसर्च बताती हैं कि जो लोग औसतन हफ्ते में 2 बार वर्कआउट करते हैं, उन्हें प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती.'
हालांकि, दीपेश यह भी स्वीकार करते हैं कि जिम में ट्रेनर्स से बात करने पर अक्सर इसके विपरीत ही सलाह सुनने को मिलती है. इसी वजह से पिछले कुछ सालों में प्रोटीन शेक और प्रोटीन बार की बिक्री तेजी से बढ़ी है.
'चॉकलेट बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अब प्रोटीन बार बेच रही हैं. लोग कार्बोहाइड्रेट से डरने लगे हैं और प्रोटीन को अधिक अहमियत दे रहे हैं. इस गलतफहमी में कि अगर वे अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट कम कर देंगे तो अपने-आप शरीर में फैट बर्न अधिक होगा और वजन तेजी से कम होगा.'

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