
जामिया हमदर्द में 'खानदान और बंटवारे' की आपसी लड़ाई? मुश्किल में आ गई डॉक्टरी की पढ़ाई
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जामिया हमदर्द जो कभी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में मिसाल थी, आज यहां अलग ही समस्या आ चुकी है. मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में है और मेडिकल छात्र यही राह देख रहे हैं कि इस विवाद का अंत कब होगा. क्या हकीम अब्दुल हमीद का सपना इस पारिवारिक जंग में दम तोड़ देगा या मध्यस्थता इसका हल निकालेगी? यह सवाल हर उस छात्र के मन में है, जो इस संस्थान से अपने भविष्य की उम्मीद लगाए बैठा है. पढ़ें- पूरी रिपोर्ट.
दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी जो कभी यूनानी चिकित्सक और शिक्षाविद हकीम अब्दुल हमीद के सेवा और शिक्षा के सपने का प्रतीक थी, आज पारिवारिक और प्रशासनिक विवादों की आग में झुलस रही है. इस जंग का सबसे बड़ा शिकार बना है यूनिवर्सिटी का मेडिकल कॉलेज, हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR), जहां 2025-26 सत्र के लिए 150 एमबीबीएस और 50 पोस्टग्रेजुएट सीटें पूरी तरह बंद कर दी गई हैं.
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने अपनी सीट मैट्रिक्स में HIMSR को एक भी सीट आवंटित नहीं की. सवाल यह है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है और क्यों मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है? हमने इसकी एक पड़ताल करने की कोशिश की है.
पारिवारिक जंग ने लकवाग्रस्त किया जामिया हमदर्द
HIMSR के पूर्व डीन डॉ सुनील कोहली बताते हैं कि इस विवाद की शुरुआत हकीम अब्दुल हमीद के बड़े बेटे अब्दुल मुईद की मृत्यु के बाद हुई, जब हमदर्द नेशनल फाउंडेशन (HNF) के नियंत्रण को लेकर उनके भाई और बेटे के बीच खींचतान शुरू हुई. ये जंग पिछले एक दशक से चल रही है और पिछले दो सालों में इतनी तेज हो गई कि यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज अराजकता के भंवर में फंस गए. डॉ कोहली आगे कहते हैं कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट (Civil Appeal No. 3382-83/2019) की सलाह पर एक पारिवारिक समझौता (Deed of Family Settlement - FSD) हुआ, जिसमें HIMSR को जामिया हमदर्द से अलग कर हमदर्द एजुकेशन सोसाइटी के तहत स्वायत्त बनाने का फैसला लिया गया. फिर साल 2021 में यूनिवर्सिटी के सर्वोच्च निर्णायक अंग यानी बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (23 मार्च और 3 जुलाई 2021) और हमदर्द एजुकेशन सोसाइटी (18 अगस्त 2021) ने अपरिवर्तनीय रिजोलूशन के तहत इस बंटवारे को मंजूरी दे दी थी. लेकिन अब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस समझौते से मुकर रहा है.
कोर्ट में मध्यस्थता में है ये मामला
फिलहाल ये मामला न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद की अध्यक्षता में मध्यस्थता में है, और अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. डॉ कोहली ने बताया कि इससे पहले सितंबर 2022 में जस्टिस प्रतीक जालान ने सभी पक्षों से कहा था कि वो यथास्थिति बनाए रखेंगे जिसकी सभी पक्षों ने मंजूरी भी दी थी, इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) को पत्र लिखकर HIMSR की 150 एमबीबीएस और 50 पीजी सीटें वापस लेने की मांग की, जिसके पीछे नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में पाई गई अनियमितताओं का हवाला दिया गया लेकिन एक तरह से ये यथास्थिति को भंग करने की कोशिश ही दिखाई पड़ती है.

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