
जापान ने PM मोदी को कहा 'गुड लक', दोनों देशों के बीच इन 4 नए सेक्टर्स में बढ़ेगा सहयोग
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पीएम नरेंद्र मोदी जापान के दौरे पर हैं, इसके बाद वह चीन जाएंगे और एससीओ समिट में शामिल होंगे. जहां रूस और चीन के साथ नए समझौते संभव हैं. वहीं, जापान ने भारत में 6 लाख करोड़ रुपये निवेश का फैसला किया है, जिससे रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी. दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, मिनरल्स, एआई और फार्मा जैसे 4 क्षेत्रों में सहयोग और कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. वहीं, जापान के एक मंदिर ने प्रधानमंत्री मोदी को Daruma Doll गिफ्ट की है, जिसे सौभाग्य यानी 'गुड लक' का प्रतीक माना गया है.
29 अगस्त 2025 यानी शुक्रवार का दिन मौजूदा वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाएगा. आज से लेकर 2 सितंबर तक ऐसा बहुत कुछ होगा, जो पूरी दुनिया की राजनीति को प्रभावित करेगा. इसमें ये तय होगा कि टैरिफ के मुद्दे पर दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां किस तरफ जाएंगी. ये भी तय होगा कि भारत अपने रिश्तों में जापान, चीन और अमेरिका के साथ कैसे संतुलन बैठाएगा. एससीओ के मंच पर रूस, भारत और चीन के बीच कौन से नए समझौते होंगे. भारत और चीन के रिश्तों में कितनी नरमी आएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग क्या तय करेंगे और क्या भारत चीन के ट्रेडिंग ब्लॉक में शामिल होकर अमेरिका को जवाब देगा? और आखिर में सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एससीओ समिट से अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले समय में राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों में दुनिया बदलाव देखेगी.
अब तक राष्ट्रपति ट्रम्प ने ज्यादातर फैसले यही सोचकर लिए कि दुनिया को अमेरिका की हर बात माननी होगी. जो देश उनके फैसलों का विरोध करेगा, उसके खिलाफ राष्ट्रपति ट्रम्प सख्ती से पेश आएंगे और आखिरकार ये दुनिया अमेरिका के इर्द-गिर्द ही चलती रहेगी. लेकिन इस बार अमेरिका की इस मनमानी को चुनौती मिली है. अब रूस, भारत और चीन के बीच सिचुएशन ट्रायंगल बनता दिख रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि भारत अपना हर कदम बहुत सोच समझकर आगे बढ़ा रहा है. ऐसा नहीं है कि हम अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से विचलित होकर रूस और चीन के खेमे में चले गए हैं. हम अब भी वही कर रहे हैं, जिसे कूटनीति की दुनिया में बैलेंसिंग एक्ट कहते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी 7 साल बाद एससीओ समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन तो जा रहे हैं, लेकिन इससे पहले वो अभी जापान के दौरे पर हैं. चीन और जापान दोनों के रिश्तों में तनाव रहता है और इस तनाव की वजह है, इंडो पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा. जापान QUAD के मंच पर चीन की मंशा और उसकी विस्तारवादी नीतियों को लेकर चिंता जता चुका है. सोचिए प्रधानमंत्री मोदी चीन जाने से पहले इसी जापान के दौरे पर आए हैं और इसी को कहते हैं बैलेंसिंग एक्ट.
भारत वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा
इस संतुलन को बनाने में हर फैसला हमारा खुद का है. भारत इस वक्त ऐसी स्थिति में है, जहां हर देश के साथ हमारा संतुलन है और हम ये देख रहे हैं कि कहां हमारे हित ज्यादा सुरक्षित हैं. उदाहरण के लिए मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका से भी हमारी बातचीत बंद नहीं हुई है, जापान के साथ भी हम द्विपक्षीय सम्मेलन कर रहे हैं और इसके बाद प्रधानंत्री मोदी चीन में एससीओ समिट में भी शामिल होने वाले हैं. यानी सारे दबावों को खारिज करके भारत अपनी शर्तों पर वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है.
अब ये समझते हैं कि जापान, भारत से क्या चाहता है और भारत, जापान से क्या चाहता है.

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