
जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति और भविष्य क्या? 10 प्वाइंट में समझें
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जम्मू कश्मीर की मौजूदा संवैधानिक स्थिति और भविष्य को आसानी से दस बिंदुओं में समझा जा सकता है. इसमें 370 हटने के बाद क्या बदला, आगे क्या संभावनाएं हैं, जानिए.
जम्मू कश्मीर जिसका विशेष दर्जा दो साल पहले केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया था, उसको लेकर सरकार का फ्यूचर प्लान क्या होगा, इसको लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. राज्य का दर्जा वापस मिलना, विधानसभा की सीटों का बढ़ना, या ऐसी ही दूसरी संभावनाओं को लेकर चर्चा जारी है. लेकिन अगर कश्मीर के नेताओं से बातचीत के बाद पीएम मोदी इन बदलावों को मंजूरी भी देते हैं तो इन्हें होते-होते करीब तीन साल का वक्त लग जाएगा.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









