
जब डिपॉजिट कम है तो बैंक लोन क्यों बाँट रहे हैं: दिन भर, 17 जनवरी
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पहले जातीय जनगणना कर के लोकसभा चुनाव के लिए एक बड़ा दांव चलने वाले CM नीतीश कुमार ने कल ग़रीबों को 2 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान किया है, बिहार की आर्थिक सेहत पर क्या असर डालेगा और राजनीतिक चश्मे से ये ऐलान कैसा दिखता है, बैंकों से लोन बढ़ गया है और डिपॉजिट कम हुआ है, आरबीआई के अनुसार लोन और डिपॉजिट का अंतर 2 लाख करोड़ का हो गया है. क्यों आई है ये स्थिति और इसके असर किस तरह होंगे अबकी सर्दियों में कश्मीर बर्फविहीन हो गया है और पयर्टक उदास. देखेंगे वहाँ की तस्वीर और ऐसी तस्वीर के कारण क्या हैं और क्यों ईरान और पाकिस्तान के बीच टेंशन की खाई बढ़ती जा रही है. सुनिए ‘दिन भर’ में.
लोकसभा चुनावों से पहले देश भर में वादों और जिन्हें हम अखबारों में लोकलुभावन योजनाएं पढ़ते हैं, उनका दौर शुरू हो गया है. कल बिहार से एक ऐसी ही खबर आई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया कि बिहार में गरीब परिवारों के एक-एक सदस्य को दो लाख रुपए दिए जाएंगे. ये पैसे उनको खुद का रोजगार खड़ा करने के लिए मिलेंगे. बिहार में करीब ऐसे 95 लाख परिवार हैं. आंकड़ों का गणित कहता है कि नीतीश की योजना में राज्य सरकार के खजाने से 2 लाख 50 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे.
नीतीश ने ये ऐलान उस वक्त किया जब पहले से ही ऐसी योजनाओं की ज़रूरत पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस पर बहस भी जारी है. ज़ाहिर है नीतीश के इस ऐलान के भी राजनीतिक उद्देश्य होंगे.. इस पर हम आएंगे लेकिन उससे पहले सवाल ये है कि राज्य के खजाने पर क्या असर पड़ने जा रहा है? और बिहार के पास क्या ऐसी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन है? नीतीश के इस ऐलान के पीछे क्या राजनीतिक मकसद बहुत साफ दिखते हैं, सुनिए ‘दिन भर’ की पहली ख़बर में
बैंकिंग का गणित बड़ा सरल है. हमारा पैसा जमा करना और फिर उसे ही कर्ज़ पर देना. ये साइकल जब तक स्मूद रहे बैंकों की व्यवस्था ठीक रहती है. लेकिन जब कर्ज ज्यादा हो जाए और डिपॉजिट कम तो मुश्किल शुरू हो जाती है. बैंकिंग की भाषा में इसे कहते हैं Banking liquidity deficit. आरबीआई ने कल इसी से जुड़ा एक आंकड़ा जारी किया जो बता रहा है कि देश में बैंकों की सेहत अच्छी नहीं है. और देश के बैंकों में Banking liquidity deficit का आंकड़ा 2 लाख करोड़ को पार कर गया है. यानी इन बैंकों से जितना लोन लिया गया वहाँ डिपॉजिट 2 लाख करोड़ रुपए कम है. अब इससे हमें क्यों परेशान होना चाहिए ये सवाल तो है ही लेकिन उससे पहले इतने बड़े नंबर तक डेफ़िसिट आया कैसे, कैसे ये कर्ज और डिपॉजिट का अंतर दो लाख करोड़ तक पहुंच गया. ये आंकड़ा किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी बड़ी चिंता है और दूसरा कि आम आदमी को ये आंकड़ा कैसे परेशान कर सकता है? सुनिए ‘दिन भर’ की दूसरी ख़बर में.
कश्मीर की बर्फ कहां गई?
कश्मीर का नाम सुनते ही आपके मन में सबसे पहला सीन बर्फबारी का आता होगा. लेकिन अगर कहा जाए कि अब ये सीन बदल गया है.. तो आपको यकीन आएगा? ऐसा ही हुआ है. बर्फबारी की आस में कश्मीर आए टूरिस्ट ठगा महसूस कर रहे हैं क्योंकि इस बार यहाँ बमुश्किल ही बर्फबारी हुई है.आमतौर पर इस मौसम में गुलमर्ग बर्फ से ढका होता है. हाल ही में गुलमर्ग की भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जहां पिछले साल की तुलना में इस साल की तस्वीर दिखाई गई है. और बताया जा रहा है कि कैसे वहां पिछले साल बर्फ की चादर बिछी हुई थी. और इस साल बर्फ का एक टुकड़ा नजर नहीं आ रहा. इसको लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चिंता जताई जा रही हैं. तो जम्मू कश्मीर में हो क्या रहा है.. लोकल्स की क्या चिंता है, जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी नहीं होने के पीछे के फैक्टर्स क्या हैं, जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी नहीं होने से टूरिज्म इंडस्ट्री पर क्या इफेक्ट पड़ेगा और लोकल इकॉनामी इससे कैसे प्रभावित होगी. सुनिए ‘दिन भर’ की तीसरी ख़बर में.

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