
जब चौधरी चरण सिंह के नाम पर एयरपोर्ट से बदल गया था RLD का गठबंधन
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चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने के ऐलान के बाद आरएलडी ने एनडीए का दामन थाम लिया है. यह कोई पहला मौका नहीं है जब चौधरी चरण सिंह के नाम हुए किसी ऐलान से आरएलडी का गठबंधन बदला हो. यूपीए सरकार के समय भी लखनऊ एयरपोर्ट का नामकरण चौधरी चरण सिंह के नाम किए जाने के बाद आरएलडी का गठबंधन बदल गया था.
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान हुआ और लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में गठबंधनों का गणित बदल गया. चौधरी चरण सिंह के पोते और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के प्रमुख जयंत चौधरी अब समाजवादी पार्टी के साथ पुराना नाता तोड़कर, विपक्षी इंडिया गठबंधन का हाथ झटक सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के खेमे में आ गए हैं. सरकार की ओर से पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न के ऐलान और इसके बाद जयंत के पालाबदल ने डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय के एक दांव की यादें ताजा कर दी हैं.
यूपीए सरकार ने तब आरएलडी को अपने पाले में करने के लिए एयरपोर्ट का नाम बदल दिया था. हालांकि, इस दांव का तात्कालिक लाभ कांग्रेस को नहीं मिला लेकिन इस फैसले के करीब तीन साल बाद आरएलडी यूपीए के साथ आ गई और इसकी बुनियाद एयरपोर्ट का नामकरण चौधरी चरण सिंह के नाम पर किए जाने के फैसले को ही माना गया. दरअसल, 2008 में जब यूपीए-1 की सरकार थी, तब अमेरिका के साथ परमाणु डील के मुद्दे पर लेफ्ट ने मनमोहन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. लेफ्ट के समर्थन वापस लेने के बाद मनमोहन सरकार अल्पमत में आ गई थी. सरकार को संसद में बहुमत साबित करना था और इसके लिए 22 जुलाई 2008 की तारीख तय हुई थी.
उस समय 2004 का लोकसभा चुनाव सपा और आरएलडी ने गठबंधन कर लड़ा था. सपा के तत्कालीन प्रमुख मुलायम सिंह यादव तीसरे मोर्चा का झंडा उठाए हुए थे. सपा के पास लोकसभा की 37 सीटें थीं और आरएलडी के तीन सांसद थे. मुलायम ने तीसरे मोर्चे का हाथ झटक यूपीए सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया लेकिन नंबरगेम में मनमोहन सरकार तब भी फंसती दिख रही थी. आरएलडी की कमान तब जयंत चौधरी के पिता अजित चौधरी के हाथों में थी. कांग्रेस ने आरएलडी का समर्थन पाने के लिए चौधरी अजित सिंह की मान-मनौव्वल शुरू कर दी और संसद में शक्ति परीक्षण से ठीक पांच दिन पहले 17 जुलाई 2008 को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट का नाम बदलकर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट करने का ऐलान कर दिया.
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सरकार के इस फैसले के बावजूद आरएलडी का समर्थन तब यूपीए को नहीं मिल सका. अजित ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को अमर सिंह चला रहे हैं और हम उस सरकार का समर्थन नहीं कर सकते. तब अजित और अमर सिंह की अदावत जगजाहिर थी. यूपीए सरकार के इस एयरपोर्ट वाले दांव और सपा के यूपीए को समर्थन के बाद आरएलडी का गठबंधन जरूर बदल गया. मुलायम का साथ छोड़कर अजित बीजेपी के साथ आ गए और 2009 का लोकसभा चुनाव एनडीए के घटक दल के रूप में लड़ा. आरएलडी ने सात लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और उनमें से पांच जीते भी लेकिन यूपीए की सरकार बन गई और एनडीए को विपक्ष में बैठना पड़ा.
हालांकि, चौधरी अजित की पार्टी 2011 में यूपीए में शामिल हो गई. अजित सिंह को मनमोहन सिंह सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया. अजित के इस फैसले की बुनियाद आरएलडी और कांग्रेस की दूरी पाटने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट का नाम बदलने के फैसले को ही माना गया. अजित उस ऐलान के तीन साल बाद यूपीए के साथ आए लेकिन तब भी आरएलडी का गठबंधन तो बदला ही था. यह अलग बात है कि अमौसी एयरपोर्टा का नाम चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट किए जाने के बाद आरएलडी, यूपीए में न आकर एनडीए में चली गई थी लेकिन सपा से गठबंधन तो टूट ही गया था.

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