
छत्तीसगढ़: नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर बनेगा जंगल वारफेयर कॉलेज
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बीजापुर की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर देश का दूसरा जंगल वारफेयर कॉलेज बनेगा, जहां CRPF और अन्य बलों को ट्रेनिंग मिलेगी. यह इलाका हाल ही में बड़े ऑपरेशन में नक्सलियों से मुक्त हुआ. सरकार ने इसे नक्सलवाद खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है. 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य है.
छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जल्द ही देश का दूसरा जंगल वारफेयर कॉलेज स्थापित किया जाएगा. यह जगह कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ मानी जाती थी. इस कॉलेज में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), छत्तीसगढ़ पुलिस, DRG, कोबरा और अन्य सशस्त्र बलों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी. इसका निर्माण केंद्र सरकार करेगी, जबकि एप्रोच रोड और अन्य बुनियादी सुविधाएं राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी.
प्रदेश में इससे पहले साल 2004 में कांकेर में काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज खोला गया था. कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर बनने वाला यह नया केंद्र नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को और मज़बूत करेगा.
यह वही इलाका है, जिसे इसी साल सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया है. 21 अप्रैल 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन के दौरान 21 दिन तक चली कार्रवाई में 31 नक्सली ढेर हुए. सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने 214 बंकरों को ध्वस्त कर दिया और माओवादियों की करीब चार तकनीकी इकाइयों को भी नष्ट कर दिया. यह अभियान अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जा रहा है.
''नक्सलियों की राजधानी...'
कर्रेगुट्टा पहाड़ी रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है. करीब 900 मीटर ऊंची इस दुर्गम पहाड़ी में सैकड़ों गुफाएं हैं, जिन्हें नक्सली लंबे वक्त से अपने कैंप और हथियार बनाने की इकाइयों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. यही वजह है कि इसे नक्सलियों की “राजधानी” तक कहा जाता था. हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यहां चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में शामिल जवानों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया. इस मौके पर पूरे देश ने सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम को सलाम किया.
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