
चुनावी रणनीति या घोटाले के सबूत... ग्रीन फाइल में आखिर क्या? अदालत की चौखट पर पहुंची ममता और ED की रार
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ईडी ने गुरुवार को I-PAC और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस बीच अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने काफिले के साथ वहां पहुंचीं और एक हरे रंग की फाइल और कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लेकर बाहर निकलीं. कोलकाता से दिल्ली तक अब एक ही सवाल गूंज रहा है आखिर उस हरे रंग की फाइल में क्या है?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में संवैधानिक मर्यादाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. राजधानी कोलकाता में जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम 'कोयला घोटाले' की जांच के लिए छापेमारी कर रही थी, तब सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गईं.
ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने जांच के बीच से 'हरे रंग की फाइल' और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (हार्ड डिस्क) लेकर बाहर निकल आईं. इस एक घटना ने कोलकाता से दिल्ली तक सियासी भूचाल ला दिया है. इसके बाद से सबसे ज्यादा चर्चा उस हरे रंग की फाइल की हो रही है, जिसे बचाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी.
जब ममता प्रतीक जैन (आई-पैक के निदेशक) के घर से इस फाइल को सीने से चिपकाए बाहर निकलीं, तो देश के सामने कई सवाल खड़े हो गए. क्या इस फाइल में 2026 के विधानसभा चुनाव की जीत का ब्लूप्रिंट कैद है? या फिर इसमें उस घोटाले के पन्ने छिपे हैं, जिसकी तलाश में ईडी की टीम वहां पहुंची थी?
ममता बनर्जी का दावा है कि बीजेपी ईडी के जरिए उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों की संभावित सूची को 'चोरी' करने की कोशिश कर रही है. वहीं, बीजेपी का पलटवार है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डालकर और घोटाले के सबूत छीनकर अपराध किया है, जिसके लिए उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए.
प्रतीक जैन के घर दिखा हाईवोल्टेज ड्रामा
सुबह करीब 11 बजे साल्ट लेक स्थित आई-पैक (I-PAC) के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर ईडी ने दबिश दी. जैसे ही खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला दनदनाते हुए प्रतीक जैन के घर पहुंचा. वह सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर दाखिल हुईं और कुछ ही देर बाद हाथ में हरे रंग का फोल्डर और लैपटॉप (हार्ड डिस्क) लेकर बाहर आईं.

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